Thursday, July 16, 2026
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HomeDainik Bureau Deskआचार्य वर्धमान सागर का गुणानुवाद करना संयम और वात्सल्य की वंदना है

आचार्य वर्धमान सागर का गुणानुवाद करना संयम और वात्सल्य की वंदना है


Deoli News 16 जुलाई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) आचार्य वर्धमान सागर महाराज के 37वें आचार्य पदारोहण दिवस पर गुरुवार को मुनि वैराग्य सागर महाराज एवं मुनि सुप्रभ सागर महाराज के सानिध्य में श्रद्धा व गुरु भक्ति के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8 बजे संगीतमय गुरुपूजा एवं गुणानुवाद सभा से हुई। यहां मुनि वैराग्य सागर महाराज एवं मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि आचार्य वर्धमान सागर का गुणानुवाद करना साक्षात संयम, तप और वात्सल्य की वंदना करने के समान है। उन्होंने कहा कि आचार्य वर्धमान सागर को संपूर्ण जैन समाज में “वात्सल्य वारिधि” अर्थात करुणा और स्नेह का समुद्र कहा जाता है। वे दिगंबर जैन मुनि परंपरा के कठोर मूलगुणों के अक्षुण्ण पालक हैं तथा वर्तमान में 36 से अधिक साधुओं के विशाल संघ का अनुशासित एवं कुशल संचालन उनकी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता का परिचायक है।

इस दौरान आचार्य का चित्र अनावरण मनोहरलाल कासलीवाल एवं दिनेश कुमार कासलीवाल ने किया। मुनियों का पादप्रक्षालन शांतिलाल सोनी, सुरेश कुमार सोनी, महावीर प्रसाद गोधा एवं सुशील कुमार गोधा (डाबर) ने किया। वहीं शास्त्र भेंट का अवसर विनय कुमार, महावीर प्रसाद, धनराज सांडला, डॉ. विमल तथा देशबंधु जैन को प्राप्त हुआ।

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