14 मई को होगा शिलान्यास
Deoli News 13 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) श्री सांवरिया सेठ मंदिर निर्माण समिति के तत्वावधान में आयोजित पवित्र शिलाओं का नगर भ्रमण कार्यक्रम मंगलवार को धार्मिक उल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। नवनिर्मित मंदिर के लिए आई इन पवित्र शिलाओं के दर्शन के लिए समूचे शहर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान नगर कुचलवाड़ा रोड स्थित मंदिर से हुई, जहाँ दोपहर 3 बजे शिला रथ को जयकारों के साथ रवाना किया गया। इससे पूर्व समिति द्वारा शिलाओं का विधिवत शुद्धिकरण और पूजन किया गया था। यात्रा का प्रवाह राधे-राधे स्कूल से होते हुए कोटा रोड की ओर बढ़ा, जहाँ श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर रथ का स्वागत किया। इसके बाद शिला यात्रा एजेंसी क्षेत्र, पेट्रोल पंप और शर्मा क्लासेज से गुजरती हुई पुलिस थाने के सामने पहुंची। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, भक्ति का उत्साह बढ़ता गया। इस बीच बस स्टैंड के पास भारत गैस एजेंसी देवली प्रबंधक पंकज शर्मा, लोकेश लक्षकार, सत्यनारायण सरसड़ी समेत लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इससे पहले मुख्य मार्ग पर युवाओं ने जेसीबी पर खड़े होकर पवित्र शिलाओं की बग्गी व श्रद्धालुओं पर पुष्प बरसाए।
जहाजपुर चुंगी नाका पर स्वागत के बाद रथ ने जगदीश धाम की ओर प्रस्थान किया। यहाँ से भ्रमण गणेश रोड, कीर मोहल्ला, अंबेडकर सर्कल, ममता सर्कल और छतरी चौराहा समेत प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरा। नगर भ्रमण के दौरान पूरा शहर सांवरिया सेठ के भजनों और डीजे की धुन पर थिरकता नजर आया। पीर बाबा क्षेत्र से होते हुए यात्रा काला हत्था, णमोकार हॉस्पिटल और कॉलेज रोड पहुंची।
कलाकारों ने बांधी समां
मार्ग में जगह-जगह भव्य स्वागत द्वार बनाए गए थे, जहाँ लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। समिति अध्यक्ष रामसिंह शक्तावत ने बताया कि यह एक ऐतिहासिक यात्रा रही, जिसमें शहर के हर वर्ग ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

बारिश की तरह बरसे पुष्प
भगवान के स्वागत में पूरा शहर फूलों की खुशबू और भक्तिमय संगीत से सराबोर रहा। लोगों ने जैसे भी मशीन पर बैठकर पुष्प बरसाए। संजीव साथियों ने लोगों का मन मोहा। मंदिर पहुँचने पर शिलाओं की विशेष आरती की गई, जिसके साथ ही इस भव्य नगर भ्रमण का समापन हुआ। इस दौरान मंदिर समिति से जुड़े हुए संपत सुवालका, केपी सिंह नरूका, पंकज सिंहल, मंदिर पुजारी पं राजकुमार शर्मा, पं दुर्गाप्रसाद शर्मा, अमरचंद गुप्ता, पंकज जैन सर्राफ़, मनीष पाराशर, विनोद गोयल, अशोक दुबे आदि साथ चल रहे थे।



