न्याय के देवता की पूजा से दूर होंगे कष्ट
Deoli News 11 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाने वाली न्यायाधिपति शनिदेव की जयंती इस वर्ष 16 मई शनिवार को विशेष महासंयोग के साथ मनाई जाएगी। मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान के निदेशक बाबूलाल शास्त्री के अनुसार इससे पूर्व 2016 में शनिवार के दिन शनि जयंती का संयोग बना था।
इस बार अमावस्या तिथि सुबह 5:11 बजे से अर्द्धरात्रि बाद 1:34 बजे तक रहेगी। भरणी नक्षत्र, मेष व वृष का चंद्रमा और सौभाग्य एवं शोभन योग का यह दुर्लभ मेल साढ़ेसाती, ढैया व शनि महादशा से पीड़ित जातकों के लिए विशेष सिद्धिदायक और शुभ फलदायी है। इसी दिन वट अमावस्या होने से सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए वट सावित्री का पूजन भी करेंगी। उन्होंने बताया कि शनिदेव को ‘न्याय का देवता’ माना जाता है। इस दिन मंदिरों में सरसों का तेल अर्पित करने की विशेष परंपरा है। पौराणिक कथा के अनुसार जब रावण पुत्र मेघनाद से युद्ध में शनिदेव घायल हुए थे।
तब हनुमान जी ने उनके शरीर पर सरसों का तेल लगाकर उनकी पीड़ा दूर की थी, तभी से उन्हें तेल अत्यंत प्रिय है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सरसों का तेल औषधीय गुणों से भरपूर है, जो रक्त संचार और त्वचा के लिए लाभकारी है।
“ऐसे करें भगवान शनि की पूजा’
शनि पूजा के लिए शनिवार को स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर ‘ॐ शनिदेवाय नमः’ मंत्र के साथ तेल, नीले फूल, काले तिल और उड़द अर्पित कर दीपक जलाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भक्तों को कष्टों से मुक्ति मिलती है।



