Deoli News 22 अक्टूबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) महावीर दिगंबर जैन मंदिर में शांति सागर व्यक्तित्व परिचर्चा का शुभारंभ गुरुवार को हुकुमचंद मनोज कुमार सेठी परिवार द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसके बाद मंडप उद्घाटन के साथ परिचर्चा का आगाज हुआ।

मुनि वैराग्य सागर ने कहा कि जिस घर में मुखिया नहीं होता, वह नष्ट हो जाता है। जिस समाज में नेता नहीं होता, वह समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार जिस धर्म का गुरु नहीं होता, वह भी विलुप्त हो जाता है। आचार्य शांति सागर महाराज ने दिगंबर श्रमण परंपरा को पुनर्जीवित किया। उनके प्रभाव से आज बड़ी संख्या में दिगंबर मुनि दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने उस समय परंपरा रूपी वृक्ष लगाया, जिसके फल आज दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि आचार्य शांति सागर महाराज ने आचार्य पद स्वीकार कर दिगंबर श्रमण परंपरा पर बड़ा उपकार किया और आचार्य पद का मान बढ़ाया। कर्नाटक में जन्म लेकर उन्होंने पूरे भारत में जैन धर्म का गौरव बढ़ाया। उन्होंने मुनि पद का निर्दोष पालन कर वर्तमान मुनियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
संजय जैन, शांतिलाल सोनी और अंकित जैन डाबर ने बताया कि परिचर्चा में आचार्य शांति सागर महाराज के गृहस्थ जीवन, परिवार, वंश परंपरा, विहार, दीक्षा एवं आचार्य पद पर चर्चा हुई। इससे पहले समाज के लोगों और विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने आचार्य शांति सागर महाराज की पूजा-अर्चना कर अर्घ्य समर्पित किए।


