Deoli News 15 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) सनातन धर्म की गणनाओं में इस बार एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग बनने जा रहा है। देवली सहित देशभर के श्रद्धालु आगामी 17 मई से भक्ति के विशेष कालखंड ‘पुरुषोत्तम मास’ (अधिक मास) में प्रवेश करेंगे।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार सौर और चंद्र वर्ष के बीच के अंतराल को संतुलित करने वाला यह 13वां महीना 30 जून तक चलेगा। पंडित कुलदीप शर्मा का कहना है कि जब सूर्य की संक्रांति जिस माह में नहीं होती, तो वह ‘अधिक मास’ कहलाता है। इस बार यह विशेष अवसर ज्येष्ठ मास में आ रहा है, जिसकी शुरुआत रविवार को कृतिका नक्षत्र और वृष राशि के साथ होगी। इस दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक आयोजनों पर विराम रहता है, लेकिन जप, तप और दान के लिए यह स्वर्ण काल है।
पुरुषोत्तम मास में सात्विक जीवनशैली का पालन करते हुए भूमि पर शयन करने और प्रभु का ध्यान करने का विधान है। कष्टों से मुक्ति के अभिलाषी भक्तों के लिए कांस्य पात्र में घी, गुड़ और गेहूं के आटे से निर्मित मालपुओं का दान करना मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला बताया गया है। लाल चंदन और पुष्पों से भगवान विष्णु का पूजन कर भक्त अक्षय पुण्य की प्राप्ति कर सकते हैं।




