यदि अब भी नही चली त्रिवेणी तो खाली रह जाएगा डैम
@ राजेन्द्र बागड़ी
Deoli News 1 अगस्त ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) प्रदेश के जयपुर समेत कई बड़े शहरों की पानी की आस बीसलपुर डैम के लिए अब अगले 25 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाले है। यदि इस अवधि में डेम के चित्तौड़, भीलवाड़ा जिलों तक फैले विस्तृत कैचमेंट एरिया में जमकर वर्षा नही हुई तो इस वर्ष डेम के के खाली रहने की आशंकाए बढ़ जाएगी।
गौरतलब रहे पूरे जुलाई महीने के गुजर जाने के बाद भी बीसलपुर डेम के प्रमुख जलावक केंद्र त्रिवेणी पर पानी की आवक शून्य बनी हुई है, जो वाकई चिंताजनक तथ्य है। वर्ष 2004 में पहली बार डेम के पूर्ण जलभराव होने के बाद से ये एक ट्रेक रिकॉर्ड रहा है कि बीसलपुर डेम में 80 फीसदी पानी अगस्त के महीने में ही आता है। डेम की हाईड्रोलॉजी रिपोर्ट के अनुसार डेम 10 वर्षो में तीन बार भरेगा। यह भी गौरतलब बात है कि बीसलपुर डेम बनने के बाद 14 अगस्त से 22 अगस्त की अवधि में ही ओवरफ्लो हुआ है। कहने का तात्पर्य सीधा है कि ट्रेक रिकॉर्ड के मुताबिक बीते 18 वर्षो के दौरान अगस्त के महीने में ही ओवरफ्लो हुआ और डेम के गेट खोलकर जल निकासी करनी पड़ी। करीब 38.70 टीएमसी क्षमता के इस बड़े डेम में करीब 218.36 वर्ग किमी क्षेत्र जलभराव में आता है।
ऐसे में ये स्पष्ट है कि यदि डेम छलकेगा तो अगस्त महीने में ही या नही तो फिर ये आस फिर अगले वर्ष के लिए जुड़ जाएगी। आखरी बार ये डेम वर्ष 2019 में छलका था, यानि अबकी बार 4 साल से इसके छलकने की आशा लोग लगाएं बैठे है। लिहाजा ये माना जाता है कि अगस्त का महीना डेम के लिए महत्वपूर्ण है।
इन बरसों में छलका डेम
वर्ष 1999 में बनकर तैयार हुए डेम में पहली बार वर्ष 2004 में पहली बार पूर्ण भराव क्षमता से पानी भरा ओर 15 अगस्त को डेम के सभी 18 गेट खोलकर अधिशेष पानी की निकासी करनी पड़ी। इसके बाद ये डेम दूसरी बार वर्ष अगस्त 2006 में, तीसरी बार वर्ष 2014 में चौथी बार वर्ष 2016 में और पांचवीं बार वर्ष 2019 में छलका था। आंकड़े बताते है कि इस बार डेम के पूर्ण भरने की आशा बीते 4 साल से प्रतीक्षा में है।
वर्ष 2006 के बाद भी एक समय ऐसा आया था, जब 8 वर्ष तक डेम छलक नही पाया और ये वक्त था, 2006 के बाद का। जब डेम को छलकने के लिए वर्ष 2014 तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। अभी भी त्रिवेणी शून्य पर है। बीस साल में 6 बार छलकने वाले बीसलपुर डेम में अबकी बार पूरी आशा तो है लेकिन कैचमेंट में वर्षा नही होने से फिलहाल आवक नही बन पाई है।
बनास, बेड़च, डाई, गम्भीरी, मैनाली, खारी, कोठारी पर निर्भर है सब कुछ
बीसलपुर डेम का कैचमेंट भीलवाड़ा, चित्तौड़, राजसमन्द जिलों तक फैला है। करीब 55 हजार वर्ग किमी क्षेत्र का ये कैचमेंट बीसलपुर डेम को भरने में सहायक है। अब तक के इतिहास के मुताबिक करीब आधा दर्जन से अधिक नदियों का पानी बीसलपुर डेम में आता है। लेकिन उक्त सभी नदियां कभी एक साथ नही चली। अधिकांश तौर पर मैनाली, बेड़च नदियां ही त्रिवेणी को सरसब्ज रखती है।
बनास पर कपासन क्षेत्र में बना मातृकुंडिया डेम, निम्बाहेड़ा का गम्भीरी डेम, मांडलगढ़ का गोवटा, जेतपुरा बांध ही प्रमुख तौर पर पानी की आवक बढ़ाते है। सूचना के मुताबिक जब तक उक्त बांध छलक नही जाते, तब तक त्रिवेणी पर पानी की आवक नही होगी। लिहाजा अगस्त का महिना सबसे महत्वपूर्ण रहेगा, अगर इस अवधि में ये डेम नही भरा तो फिर सम्भावनाए नगण्य होती चली जाएगी।


