(राजेन्द्र बागड़ी)
Political News 15 जनवरी ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) राजनीति में यूं ही मिलना आसान नही होता! मिलने के कई मायने होते है। पूर्व कृषि मंत्री लालचंद कटारिया के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ से मुलाकात कई चर्चाओं को जन्म दे रही है। यद्दपि उपराष्ट्रपति धनकड़ जाट जाति से आते है।
लिहाजा ये मुलाकात भले ही औपचारिक प्रतीत होती हो, लेकिन इसके पीछे कई कारण है। अव्वल तो कटारिया ने विधानसभा का चुनाव लड़ने से ही मना कर दिया। ऐसे में ये मुलाकात सहज भी नही है और आसान भी नही है। सवाल यहीं से उपजते है क्या कटारिया का मन परिवर्तन हो रहा है? या उनके मन मे कुछ और पनप रहा है। उपराष्ट्रपति के साथ कटारिया की मुलाकात सूबे की राजनीति को नया सन्देश दे रही है।इस दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कुछ पदाधिकारी भी मौजूद थे। ऐसे में इसके गहन अर्थ है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण व प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कांग्रेस के बड़े नेताओं के नही जाने के बाद लगता है कांग्रेसी नेताओं में मन में नाराजगी है। आने वाले लोकसभा चुनावों में जो वातावरण बन रहा है, उससे लगता है कि अब” हवाएं” कुछ संकेत देने लगी है। कटारिया भी शायद ” हवा” का रुख पहचान गए है या उनके ह्रदय परिवर्तन हो रहा है।
इस बात को कैसे भी समझे। लेकिन धनकड़ की ओर से कटारिया की सराहना करना साबित करता है कि ” खिचड़ी” और पक रही है। उल्लेखनीय है कटारिया पहले एक बार लोकसभा के लिए जयपुर ग्रामीण से चुनाव लड़ चुके है। हालांकि वे सफल नही हुए ये बात अलग है। लेकिन उनकी ये मुलाकात अगली रणनीति का हिस्सा जरूर है। कटारिया बीजेपी में शामिल होंगे या नही, ये सवाल फिलहाल नैपथ्य में है, लेकिन ये चर्चा जरूर है कि कटारिया की उपराष्ट्रपति से मुलाकात कोरी कल्पित घटना नही है। आने वाले दिन इस घटना की स्क्रिप्ट लिखेंगे!



