Tuesday, April 21, 2026
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अक्षय तृतीया का पर्व त्याग, तपस्या व दान के ‘अक्षय’ फल का प्रतीक

तृतीया पर उमड़ी श्रद्धा


Deoli News 19 अप्रैल (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में अक्षय तृतीया पर आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के सान्निध्य में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर माताजी ने कहा कि अक्षय तृतीया का पर्व त्याग, तपस्या और दान-पुण्य के ‘अक्षय’ फल का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने एक वर्ष की कठिन निराहार तपस्या के बाद इसी दिन राजा श्रेयांस के हाथों गन्ने के रस का आहार ग्रहण किया था। माताजी ने कहा कि जैन परंपरा में यह दिन विशेष रूप से आहार दान, ज्ञान दान और औषधि दान के माध्यम से अमर पुण्य अर्जित करने का महान अवसर है। अध्यक्ष संजय जैन और प्रवक्ता अंकित जैन डाबर ने बताया कि महोत्सव का शुभारंभ माताजी के सान्निध्य में अभिषेक और शांतिधारा के साथ हुआ।

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इसके बाद आयोजित धर्मसभा में चित्र अनावरण का अवसर नंदलाल जैन डाबर परिवार को प्राप्त हुआ। माताजी के पाद प्रक्षालन का पुण्य लाभ महावीर अजमेरा ने लिया, वहीं शास्त्र भेंट करने का अवसर तेजमल पाटनी (लुहारी) को मिला। यहां बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रावकों ने माताजी के आहार के लिए विधि-विधान से पड़गाहन की क्रिया संपन्न की। भगवान ऋषभदेव के प्रथम आहार की स्मृति में मंदिर परिसर में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को गन्ने के रस (इक्षु रस) का वितरण किया गया।

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