Deoli News 2 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर देवली में आर्यिका विज्ञाश्री माताजी संघ के सानिध्य में गणाचार्य विराग सागर के 64वें अवतरण दिवस और पट्टाचार्य विशुद्ध सागर के प्रथम पट्टाचार्य महोत्सव पर श्री जिनसहस्रनाम महाअर्चना का आयोजन हुआ।

प्रवक्ता अंकित जैन डाबर ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान अभिषेक, द्रव्य शुद्धि और वज्रपंजर रक्षा कवच के साथ मांगलिक क्रियाएं संपन्न की गईं, जिसमें श्रद्धालुओं ने नवदेवता एवं सहस्रनाम पूजन कर 1008 मंत्रों के साथ 11 शांतिधाराएं कीं। यहां माताजी ने प्रवचन में जिनसहस्रनाम भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि भक्ति से ही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है और संकटों के समय आचार्य भगवंतों ने भी इसी भक्ति का सहारा लेकर निर्विकल्प अवस्था प्राप्त की। उन्होंने समझाया कि जीवन में विघ्न डालने वाले अंतराय कर्म ही मनुष्य को दुःखी करते हैं और इन दुःखों से मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय चमत्कारिक सहस्रनाम की भक्ति है।
माताजी ने जोर दिया कि आस्था से ही रास्ता मिलता है और यदि जीवन के काँटों को दूर करना है तो आस्था रूपी गाड़ी में बैठकर मोक्ष की मंजिल की ओर बढ़ना होगा। महोत्सव के दौरान मण्डल पर 1008 बादाम और श्रीफल अर्पित किए गए तथा शाम को माताजी द्वारा रचित णमोकार दीपार्चना में 35 परिवारों ने महामंत्र की आराधना की। इसी तरह 64 दीपकों से आचार्य की महाआरती की गई।
प्रतीक जैन ने बताया कि 3 मई को आर्यिका विज्ञाश्री माताजी का 15वां गणिनी पदारोहण दिवस महोत्सव मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं।


