जैविक खेती की आवश्यकता बताई
Deoli News 17 दिसंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) दूनी सहायक निदेशक सभागार में परम्परागत कृषि विकास योजनार्न्तगत कृषक प्रशिक्षण का आयोजन हुआ। जिसमें कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में की गई सिफारिश के अनुसार उर्वरक प्रयोग करने की सलाह दी गई।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि परम्परागत खेती आज के समय कि आवश्यकता है। अंधाधुन्ध उर्वरक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा क्षमता कमजोर होती है। साथ ही मानव स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। लिहाजा किसान अपनी मृदा की जांच प्रयोगशाला में कराए एवं कृषि वैज्ञानिको की सिफारिश के अनुसार ही उर्वरक प्रयोग करें। मिट्टी एवं पानी की जांच मात्र 5 रुपए शुल्क निर्धारित है। संतुलित उर्वरक उपयोग से मृदा की उर्वरा शक्ति बनी रहती है एवं उत्पादन क्षमता भी बनी रहती है। सहायक निदेशक बाबूलाल यादव ने कहा कि कृषि विभाग की कई प्रकार की योजनाएं हैं।
जिनका किसान ऑनलाइन आवेदन कर लाभ उठा सकते हैं। सरसो की फसलों में यदि किसी रोग का प्रकोप दिखाई दे। कृषि विभाग के कृषि पर्यवेक्षक एवं सहायक कृषि अधिकारी से संपर्क कर सलाह ले सकते है। सहायक निदेशक मुख्यालय दुर्गा शंकर कुम्हार ने जैविक खेती पर कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती आवश्यक है, कृषक अधिक से अधिक जैविक उत्पादन करे एवं प्रमाणीकरण संस्था से प्रमाण पत्र लेने पर मूल्य भी अधिक मिलता है। इसी तरह अन्य कृषि अधिकारियों ने भी जानकारी दी। यहां सहायक कृषि अधिकारी रामावतार उपाध्याय, कृषि पर्यवेक्षक गैरोली शंकर लाल बैरवा, रेखा गुर्जर कृषि पर्यवेक्षक घाड, भगवान मीणा चांदसिंह पुरा, मुकेश खींची चांदली, रामफूल गुर्जर, बिरधी चन्द कुमावत, प्रहलाद धाकड़, मानसिंह मीणा, रमेश बैरवा सहित कई प्रगतिशील कृषक मौजूद थे।




