Deoli News 10 अक्टूबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) बागवानी विभाग के सहायक प्रोफेसर किंकर सिंह विशेषज्ञ की देखरेख में बीएससी कृषि (ऑनर्स) द्वितीय वर्ष के छात्रों ने संरक्षित खेती पर व्यावहारिक सत्र में भाग लिया।
छात्रों ने नर्सरी के खेत से नेट हाउस में सफलता पूर्वक पौधे रोपे, उचित पंक्ति-से-पंक्ति और पौधे-से-पौधे की दूरी बनाए रखने सहित महत्वपूर्ण तकनीकें सीखी। इसके अलावा उन्होंने खीरे के बीज बोने का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। जिससे आधुनिक कृषि पद्धतियों के बारे में उनकी समझ बढ़ी। यह व्यावहारिक अनुभव छात्रों को बागवानी के क्षेत्र में सफल होने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विद्यार्थियों को बताया कि संरक्षण कृषि एक ऐसी कृषि प्रणाली है, जो कृषि योग्य भूमि के नुकसान को रोक सकती है। जबकि क्षरित भूमि को पुनर्जीवित कर सकती है। यह स्थाई मृदा आवरण, न्यूनतम मृदा व्यवधान और पौधों की प्रजातियों के विविधिकरण को बढ़ावा देती है।

एक दिवसीय शिविर आयोजित हुआ
राजकीय महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना की दोनो इकाईयों का एक दिवसीय शिविर हुआ। इस दौरान स्वयंसेवकों ने राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी निशा मीणा तथा निकिता वर्मा के निर्देशन में महाविद्यालय परिसर में श्रमदान किया। वहीं एनसीसी एवं एनएसएस ब्लॉक के बाहरी क्षेत्र की साफ सफाई की गई। इसके बाद बौद्धिक सत्र का आयोजन हुआ। जिसकी थीम विकसित भारत का मंत्र, भारत हो नशे से स्वतंत्र रखी गई थी। प्राचार्य डॉ. पूरणमल वर्मा ने स्वयंसवकों को कहा कि वर्तमान समय में युवाओं में नशे की प्रवृति तीव्रता से बढ़ती जा रही है, जो उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसलिए युवाओं की मानसिकता में परिवर्तन लाने एवं उनमें नशे से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता प्रसारित करने के उद्देश्य से महाविद्यालय में विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम हुआ।
यहां मुख्य वक्ता सत्यनारायण मीणा ने स्वयंसेवकों को नशे से दूर रहने व अन्य को भी इस विषय में जागरुक करने की बात कही। यहां राजेन्द्र प्रसाद वर्मा, विजय कुमार मीणा, नैनीवाल, डॉ. ज्योति गुप्ता, डॉ. प्रियंका जैन, डॉ. वंदना मौजूद थी।


