18 साल तक रहेगा पेटेंट अधिकार, मोदी के जय अनुसंधान का नारा सार्थक किया
Deoli News 27 दिसंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) टोंक जिले के आंवा निवासी पूर्व कृषि मंत्री एवं प्रगतिशील किसान डॉ. प्रभुलाल सैनी ने कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त करते हुए जिले व प्रदेश का नाम, देश में रोशन किया है।

भारत सरकार के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA), नई दिल्ली ने डॉ. सैनी द्वारा विकसित खजूर की तीन विशिष्ट कृषक किस्मों ST-1, ST-2 और ST-3 को आधिकारिक रूप से पंजीकृत करते हुए उनके प्रमाण-पत्र जारी किए हैं। प्राधिकरण के वैज्ञानिक डॉ. डी.एस. पिलानिया द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इन तीनों किस्मों के पंजीकरण की सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हैं और इनके संरक्षण की अवधि प्रमाण-पत्र जारी होने की तिथि 4 दिसंबर 2025 से अगले 18 वर्षों तक मान्य रहेगी। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे डॉ. सैनी का लंबा शोध और परिश्रम जुड़ा है।
उन्होंने बताया कि पेटेंट मिलने से पूर्व देश के ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिकों द्वारा इन किस्मों का लगभग 5 वर्षों तक गहन परीक्षण और अनुसंधान किया गया था। पंजीकरण की यह कानूनी प्रक्रिया 16 सितंबर 2021 को आवेदन दाखिल करने के साथ शुरू हुई थी, जिसमें विभिन्न विशिष्ट लक्षणों और शुद्धता की जांच के बाद अब अंतिम मुहर लगाई गई है। अधिनियम 2001 के प्रावधानों के तहत मिली इस मान्यता के बाद अब इन विशेष किस्मों के उत्पादन, विक्रय, विपणन, वितरण के साथ-साथ इनके आयात-निर्यात का अनन्य अधिकार डॉ. सैनी के पास सुरक्षित रहेगा। इसी तरह डॉ. प्रभुलाल सैनी को मिली इस कानूनी मान्यता और अनुसंधान के पुरस्कार से न केवल उनकी मेहनत को वैश्विक मंच पर पहचान मिली है, बल्कि इससे देश और प्रदेश के अन्य किसानों को भी नवीन कृषि प्रयोगों के लिए बड़ी प्रेरणा मिलेगी।
क्षेत्र के किसानों में इस खबर से हर्ष की है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “जय अनुसंधान” के नारे को सार्थक किया है। उन्होंने बताया कि इस किस्म की सुरक्षा के लिए किटरोधी परीक्षण और उत्पादन बढ़ाए जाने पर भी और अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इसकी क्षमता प्रति पेड़ 50 से 100 किलो है जिसे 2 क्विंटल बढ़ाए जाने की मेहनत की जा रही है।



