Monday, June 15, 2026
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HomeDainik Bureau Deskहनुमान का अर्थ है अभिमान का हनन करना- मुरारी बापू

हनुमान का अर्थ है अभिमान का हनन करना- मुरारी बापू


Deoli News 15 जून (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर के अटल उद्यान टीनशेड में चल रहे 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ में महामंडलेश्वर दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि हनुमान का अर्थ ही वह है जिसने अपने मान का हनन कर लिया हो और जो पूर्णतः अभिमान शून्य हो।

उन्होंने कहा कि अरण्यकाण्ड में प्रभु श्रीराम ने मां शबरी को माध्यम बनाकर नवधा भक्ति का जो उपदेश दिया है, वह प्रभु प्राप्ति के नौ सरल मार्ग हैं। इसमें संतों का संग, कथा प्रेम, गुरु सेवा, छल कपट का त्याग, मंत्र जप, संसार से मन हटाकर प्रभु में लगाना, सबमें भगवान देखना, संतोष भाव और सरल जीवन शामिल है। बापू ने हनुमान जी के जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किष्किन्धाकाण्ड में जब प्रभु का हनुमान जी से मिलन होता है, तो वह एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आध्यात्मिक दृष्टि से समुद्र देहाभिमान का प्रतीक है, जिसे केवल वही पार कर सकता है जो पूरी तरह से अभिमान शून्य हो।

लंका प्रस्थान के समय जब लंकिनी ने हनुमान जी का मार्ग रोका, तो उन्होंने स्वयं का आत्मचिंतन किया कि बाधा इसलिए आई क्योंकि वे अपने इष्ट राम का स्मरण करना भूल गए थे। हनुमान जी के वीरतापूर्ण कृत्यों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने अपनी शक्ति का उपयोग केवल राम कार्य के लिए किया। उन्होंने माता सीता को प्रणाम किया, अशोक वाटिका नष्ट की और रावण के अहंकार को चुनौती दी। कथा में सेतु निर्माण और विभीषण के राजतिलक के प्रसंगों को भी विस्तार से समझाया गया।

आयोजन से जुड़े रामलाल सेन ने बताया कि कथा का समापन सोमवार सुबह आयोजित पूर्णाहुति के साथ हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और धर्म लाभ अर्जित किया।

 

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