अकेलेपन की खामोश चीख : डॉ. मीणा के कमरे से मिला बिना हस्ताक्षर का सुसाइड नोट
Deoli News 18 फरवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) सरकारी अस्पताल केकड़ी में चर्म रोग विशेषज्ञ व क्षेत्र के राजकोट निवासी डॉ. अशोक कुमार मीणा की मौत का मामला अब एक भावुक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। पुलिस को चिकित्सक के आवास की गहन तलाशी के दौरान एक सुसाइड नोट मिला है।
जो उनके भीतर चल रहे मानसिक द्वंद्व व पीड़ा की गवाही दे रहा है। हालांकि इस नोट पर डॉ. मीणा के हस्ताक्षर नहीं हैं, लेकिन इसमें लिखे शब्द एक सफल चिकित्सक के पीछे छिपे उस अकेले इंसान की कहानी कह रहे हैं, जो रिश्तों की अपेक्षाओं और स्वार्थ के भंवर में फंसा हुआ था। नोट के अंशों से यह साफ झलक रहा है कि वे अपनी कमाई और खर्चों को लेकर दूसरों के नियंत्रण और अपेक्षाओं से बेहद आहत थे।
व्हाट्सएप स्टेटस पर दी थी विदाई
मंगलवार दोपहर जब डॉ. मीणा अस्पताल की ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि खिड़की के पीछे का मंजर इतना खौफनाक होगा। फंदे से झूलते उनके शव ने पूरे चिकित्सा जगत को झकझोर दिया। मौत से ठीक पहले उन्होंने अपने फोन से व्हाट्सएप स्टेटस पर “मरीज नहीं देखे जाएंगे, अनावश्यक कॉल न करें” लिखकर शायद दुनिया से अपना आखिरी संवाद कर लिया था। पुलिस की शुरुआती जांच अब उस सुसाइड नोट के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिसमें उन्होंने निस्वार्थ प्रेम की कमी और मानसिक घुटन का जिक्र किया है।
हैंडराइटिंग के मिलान से खुलेगा राज: एफएसएल की ली जा रही मदद
पुलिस उप अधीक्षक हर्षित शर्मा के अनुसार सुसाइड नोट पर हस्ताक्षर न होना इस मामले को तकनीकी जांच की ओर ले गया है। पुलिस अब इस पत्र की हैंडराइटिंग का मिलान डॉ. मीणा के पुराने दस्तावेजों से कर रही है। पत्र की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए इसे एफएसएल और फोरेंसिक विशेषज्ञों के पास भेजा जाएगा। फिलहाल, यह सुसाइड नोट उन अनकहे सवालों की ओर इशारा कर रहा है कि क्या एक साल से राजकीय जिला चिकित्सालय में सेवाएं दे रहे डॉ. मीणा पेशेवर सफलता के बावजूद निजी जीवन में पूरी तरह टूट चुके थे।



