जनादेश के आगे सब नतमस्तक, निर्दलीयों का दबदबा टूटा
@राजेन्द्र बागड़ी
Deoli News 14 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) अनअपेक्षित चुनाव परिणामों ने हर किसी को हतप्रभ किया है। बीजेपी को बड़ी सफलता मिली है, जो वाकई पार्टी के प्रबंधन, चुनावी घटजोड और समीकरणों का परिणाम है। पहली बार नए परिसीमन के बाद हुए नगरपालिका के चुनाव परिणाम इस बात को भी साबित कर रहे है कि शहर में अब निर्दलीयों की दादागिरी नही चलेगी।

हालांकि शहर में निर्दलीयों की जीत का आंकड़ा 10 के पास पहुँच गया है। लेकिन बीजेपी को बोर्ड बनाने के लिए महज एक वोट की जरूरत होगी। शहर में बीजेपी की जीत से विधायक राजेन्द्र गुर्जर का दबदबा कायम हुआ है। जबकि कांग्रेस के सांसद हरीश मीणा इस दौड़ में काफी पिछड़ गए है। उनकी राजनैतिक साख को नुकसान पहुँचा है। ऐसे में ये स्पष्ट कहा जा सकता है कि बीजेपी की ये सफलता ऐतिहासिक है। बीजेपी के सभी जीते उम्मीदवारों को बधाई। शहर के ग्रामीण इलाकों में भी भाजपा ने अपना वर्चस्व बनाया है। जबकि कांग्रेस दहाई की संख्या तक भी नही पहुँच पाई और निर्दलीयों से भी पीछे रह गई। परिणामो में देखे तो निर्दलीयों ओर कांग्रेस को मिलाकर कुल संख्या बीजेपी की 17 सीटों के बराबर बैठ रही है। लेकिन चेयरमैन बीजेपी का ही बनना तय है। बीजेपी का जादुई आंकड़ा बहुमत से एक सीट कम है। लेकिन निर्दलीयों, कांग्रेस का घटजोड भी हो जाए तो भी बीजेपी ही बाजी मार लेगी ये तय है।

ये चुनाव परिणाम इस बार ये भी इशारा कर कर रहे है कि जो धुरंधर पार्टी को पीछे रखकर निर्दलीयों के बूते पर अपना रुतबा कायम रखते थे, उनके लिए ये बड़ा धक्का है। ये शहर में पहली बार हुआ है। शहर के मतदाताओं ने जो जनादेश दिया वह वाकई सराहनीय है कि धुरंधरों को अबकी बार खास से आम बना दिया है। बीजेपी के विधायक राजेन्द्र गुर्जर पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है कि वे नगर पालिका अध्यक्ष के लिए कोई योग्य प्रत्याशी का चयन करेंगे, उन्हें ये भी देखना होगा कि इतने बड़े जनादेश के बावजूद उनका प्रत्याशी आमजनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा या नही। विधायक को बगैर किसी दबाव में आए उचित ओर सर्वमान्य उम्मीदवार का चयन करना होगा। खैर परिणामों पर इतना ही कहा जा सकता है कि मतदाताओं ने इस बार निर्दलीयों को नकारा भी नही ओर स्वीकारा भी नही । भाजपा को बहुमत के पास समीप पहुचाने में जनता- जनार्दन ने बहुत सोच समझकर फैसला किया है।
टिकट नही मिलने की आहट से दलबदल कर दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ने वालों को मतदाताओं ने नकारकर साबित किया है कि जनता निष्ठा बदलने वालों पर भरोसा नही करती। शहर की कुल 35 सीटों में बीजेपी व निर्दलीय तौर पर अनुसूचित जाति के 8 उम्मीदवार जीते है। पालिकाध्यक्ष इन्हीं में से चुना जाना है।
अनुसूचित जाति के यह उम्मीदवार जीते
शहर के अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित वार्डो में से कुल 8 उम्मीदवार जीते है। इनमें 3 उम्मीदवार भाजपा से तो 5 निर्दलीय उम्मीदवार है। जबकि अनुसूचित आरक्षित वार्डो से कांग्रेस का कोई उम्मीदवार चुनाव नही जीता। कहने का तात्पर्य ये है कि कांग्रेस को पालिकाध्यक्ष के लिए निर्दलीय पर दांव लगाना पड़ेगा। अनुसूचित वर्ग से जो जीते है, उनमें वार्ड नं 3 से सोना देवी बीजेपी, वार्ड नं 7 से ललित तेजी बीजेपी, वार्ड नं 9 से कजोडी देवी है। जबकि वार्ड नं 4 से राजबहादुर रैगर, वार्ड नं 5 से महेंद्र रैगर, वार्ड नं 6 से विनोद तेजी, वार्ड नं 29 से मुकेश कुमार व वार्ड नं 32 से बनवारी लाल बैरवा समेत 5 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है।

ऐसे में कांग्रेस को अंतत निर्दलीयों में से ही अपना अधिकृत पालिकाध्यक्ष पद का प्रत्याशी चुनना होगा। बीजेपी के पास हालांकि 18 के आंकड़े को प्राप्त करने के लिए एक निर्दलीय या अन्य का समर्थन चाहिए और मजबूती की दृष्टि से 4 से 5 सहयोगी ओर चाहिए जिससे क्रॉस वोटिंग से बच सके। फिलहाल बीजेपी और भाजपा दोनों के लिए ये भारी मशक्कत के काम इसलिए हैं कि क्रॉस वोटिंग शहर का पुराना रिकॉर्ड रहा है। इधर, शहर में विजेता प्रत्याशियों के घरों और समर्थकों में खुशी का माहौल है। आतिशबाजी और मिठाइयों का दौर जारी है।



