Deoli News 18 सिकंदर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) दसलक्षण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को उत्तम आर्जव धर्म का श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आयोजन हुआ। देवली में मुनि सुप्रभसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए मन, वचन और कर्म में सरलता अपनाने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि जैसे सांप अपनी बांबी में जाने के लिए सीधा होकर जाता है, वैसे ही व्यक्ति को अपनी अंतरंग आत्मा तक पहुंचने के लिए सरल बनना होगा। मुनि सुप्रभसागर ने कहा कि कपटपूर्ण व्यवहार व्यक्ति को विश्वसनीय नहीं बनने देता। दूसरों को धोखा देने वाला वास्तव में स्वयं को ही धोखा देता है। कुटिलता और घुमावदार व्यवहार संबंधों में बिखराव लाता है, जबकि सरल आचरण जीवन में सुख, शांति और निर्भयता लाता है। मोक्ष की प्राप्ति भी ऋजु गति से ही संभव है। मुनि वैराग्यसागर ने कहा कि छल-कपट करने वाला किसी का प्रिय नहीं हो सकता। आर्जव धर्म को धारण करने वाला स्वयं सुखी और शांत रहता है तथा दूसरों को भी सुख-शांति प्रदान करता है। इस मौके पर आचार्य वर्धमान सागर महाराज के अवतरण दिवस पर संगीतमय पूजन किया गया।
नासिरदा में विशेष पूजा-अर्चना की
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर नासिरदा में भी दस लक्षण मंडल विधान के तहत उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा की गई। पं अभिषेक कुमार ने तत्वार्थ सूत्र की पूजा कराई और आर्जव धर्म का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को छल-कपट और धोखे का त्याग कर सरलता को अपनाना चाहिए। इससे पहले भगवान पार्श्वनाथ एवं आदिनाथ भगवान का कलश अभिषेक किया गया। समाज के महामंत्री राजेश कुमार कटारिया ने बताया कि बोली के माध्यम से सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य जय कुमार, सुशील कुमार और गौरव कुमार सिंहल परिवार को मिला।
प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा भी सिंहल परिवार द्वारा की गई। शाम को मंदिर में आरती का आयोजन हुआ, जिसमें लोगों ने भाग लिया।


