Thursday, September 17, 2026
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HomeDB Exclusiveअहंकार और अकड़ से उन्नति नहीं, विनय से मिलती है मुक्ति

अहंकार और अकड़ से उन्नति नहीं, विनय से मिलती है मुक्ति


Deoli News 17 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन गुरुवार को उत्तम मार्दव धर्म पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि सुप्रभसागर महाराज ने कहा कि जब तक व्यक्ति में अहंकार और अकड़ रहती है, तब तक उन्नति, शान और समृद्धि की प्राप्ति नहीं हो सकती।

विनय गुण से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। मान कषाय व्यक्ति को किसी के सामने झुकने नहीं देती। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को ‘मैं’ की हवा लग जाती है, उसे कोई दवा और दुआ काम नहीं करती। विनय से ज्ञान में वृद्धि के साथ चारित्र ग्रहण की भावना उत्पन्न होती है। ऊंचा उठने के लिए झुकना जरूरी है। मृदुभाव धारण करने वाला व्यक्ति जल के समान सबको अपने में समाहित कर लेता है, जबकि अहंकारी व्यक्ति पत्थर की तरह सबसे अलग रह जाता है। मुनि ने कहा कि व्यक्ति भौतिक साधनों में इतना उलझ गया है कि देव, शास्त्र और गुरु की उचित विनय भी नहीं करता और आशीर्वाद की अपेक्षा रखता है। घरों में विनय के अभाव से कलह बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विनय गुण वाले व्यक्ति को बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलता है और वह उन्नति करता है। धार्मिक कार्यक्रम में मूलनायक महावीर स्वामी का प्रथम अभिषेक भीमराज जैन और मनोज कुमार ने प्राप्त किया।

महावीर स्वामी की दाईं ओर की शांतिधारा लक्ष्मीनारायण और सुनील कुमार तथा बाईं ओर की शांतिधारा पारस कुमार और हंसराज ने प्राप्त की। शांतिनाथ भगवान की शांतिधारा नंदलाल और अनिल कुमार, डाबर वाले ने प्राप्त की। संध्याकालीन महाआरती का सौभाग्य महावीर कुमार और इंद्रमल बाकलीवाल परिवार ने प्राप्त किया।

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