(यूजफुल इनफॉरमेशन)
Deoli News 9 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) मौजूदा समय में दांतों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जो एक चिंता का विषय है। देवली के डेंटिस्ट, डॉ. राहुल जिंदल के मुताबिक, “आधुनिक जीवनशैली और खाने-पीने की गलत आदतें इसके मुख्य कारण हैं। लोग अक्सर अपने दांतों की देखभाल को नजरअंदाज करते हैं, जिसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है।
डॉ. जिंदल के अनुसार, दांतों की बीमारियों के कई कारण हैं। खराब खान-पान, जंक फूड, मीठी चीजें और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन, दांतों की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा, सही तरीके से ब्रश न करना और दिन में कम से कम दो बार ब्रश न करना भी एक बड़ा कारण है। तनाव और देर से सोने की आदत भी दांतों की सड़न का कारण बन सकती है, इससे मुंह में बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए उन्होंने कुछ उपाय सुझाए और कहा कि दिन में दो बार फ्लोराइड टूथपेस्ट से ब्रश करना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही, हेल्दी डाइट अपनाना, जिसमें फल, सब्जियां और दूध शामिल हो, दांतों की सेहत के लिए फायदेमंद है।
नियमित रूप से हर 6 महीने में डेंटिस्ट से जांच करवाना भी जरूरी है। इसके अलावा खूब पानी पीने से मुंह की सफाई होती है और बैक्टीरिया कम होते हैं। डॉ. राहुल का कहना है, “यह समय है कि हम अपने दांतों की सेहत को गंभीरता से लें। दांतों की अच्छी देखभाल से हम कई बीमारियों से बच सकते हैं।
यहाँ दांतों के प्रमुख रोग और उनके उपचार की जानकारी
1. दंत क्षय (कैविटी)
क्या है : बैक्टीरिया द्वारा दांतों का इनेमल नष्ट होना।
उपचार: फ्लोराइड थेरेपी, डेंटल फिलिंग, या गंभीर होने पर रूट कैनाल ट्रीटमेंट।
2. मसूड़ों के रोग (जिंजिवाइटिस और पेरियोडोंटाइटिस)
क्या है : मसूड़ों में सूजन और खून आना, जो बाद में दांतों को सहारा देने वाली हड्डी को नुकसान पहुंचाता है।
उपचार: नियमित सफाई (स्केलिंग), गहरी सफाई (रूट प्लानिंग), या सर्जरी।
3. दांतों की संवेदनशीलता
क्या है : इनेमल हटने पर ठंडे या गर्म का एहसास होना।
उपचार : सेंसिटिविटी टूथपेस्ट, फ्लोराइड ट्रीटमेंट, या डेंटल बॉन्डिंग।
4.दांतों का घिसना
क्या है : दांतों को आपस में रगड़ने या कठोर चीजें चबाने से दांतों का पतला होना।
उपचार : माउथ गार्ड का उपयोग, क्राउन या फिलिंग।
5. दंत विकृति (टेढ़े-मेढ़े दांत)
क्या है : दांतों का सही संरेखण में न होना।
उपचार : ब्रेसेस, इनविजिबल अलाइनर, या जरूरत पड़ने पर सर्जरी।


