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देवली गांव सड़क को लेकर फिर कलक्टर से लगाई गुहार
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सवा 200 मीतर सड़क का नामोनिशान मिटा
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परिवादी ने लिया है विभिन्न न्यायालय से स्टे आर्डर
Deoli News 19 जनवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) क्षेत्र की देवली गांव की क्षतिग्रस्त सवा 200 मीटर क्षतिग्रस्त सड़क का मुद्दा एक बार फिर प्रशासन के सामने आया है। गुरुवार को ग्रामीणों ने जिला कलक्टर सौम्या झा के समक्ष गुहार लगाकर राहत दिलाने की मांग की है। लेकिन यह पूरा मामला समीप के खातेदार की संतुष्टि पर टिका है। खातेदार की असंतुष्टि से मामला न्यायालय में लंबित है।
गुरुवार को कलक्टर को सौपे गए परिवाद में बताया कि नेकचाल रोड पर सवा 200 मीटर लंबी सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। जिसमें बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। बारिश के दौरान बहुत परेशानी होती है। पूर्व में जिला कलक्टर के आदेश पर मार्ग की पाल भूमि का सीमाज्ञान हो चुका है। लेकिन समस्या यथावत है। जबकि नेकचाल सड़क पाल पर सीआईएसएफ की डामर सडक व सुरक्षा दीवार बनी है। इससे हजारों ग्रामीणों को प्रतिदिन परेशानी उठानी पड़ रही है। बालाजी दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को भी बेहद परेशानी हो रही है। लेकिन काफी कोशिश की जाने के बावजूद यह मसला निस्तारित नहीं हो रहा है। इस पर जिला कलक्टर ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वह उपखंड अधिकारी से मामले की रिपोर्ट लेंगे।
यह है पूरा मसला
दरअसल देवली गांव की उक्त सड़क का मामला खसरा नंबर 4075 से जुड़ा है, जो की 1.54 हेक्टेयर भूमि है। परिवादी हरिराम के अनुसार उक्त भूमि पर पिछले कई वर्षों से आपसी समझौते की तहत ग्रामीण आ जा रहे थे। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि 20 वर्ष पूर्व उक्त खसरे के आधे हिस्से पर सीआईएसएफ ने सुरक्षा दीवार बना दी। जबकि आधे हिस्से पर ग्रामीण आ जा रहे थे। इसके लिए ग्रामीणों ने उसे समय आंदोलन भी किया था। लेकिन तत्कालीन नगर पालिका मंडल की मनमानी से यह मामला बिगड़ गया। खसरा नंबर 4106 ही देवली गांव का मार्ग है, जो कि तालाब की पाल है। लेकिन गत कुछ वर्षों पूर्व सीआईएसएफ ने यहां सुरक्षा कारणों से दीवार बना दी। परिवादी का दावा है कि हर बार प्रशासन खसरा संख्या 4106 को सीआईएसएफ की दीवार के बाहरी ओर नापता है।
जबकि यह खसरा दीवार के भीतर पाल का है। बाद में समीप के खातेदार हरिराम ग्वाला व ग्रामीणों के बीच हुए समझौते के बाद खातेदार के खसरा नंबर 4075 के 1.54 हेक्टेयर भूमि को देवली गांव सड़क के रूप में काम में लिया जा रहा था। यह दावा परिवादी हरिराम का है। जबकि नगर पालिका मंडल ने खातेदार हरिराम ग्वाला की खसरा संख्या 4073 को सिवायचक बताकर एक सामुदायिक भवन बना दिया। जिसका पुराना खसरा नंबर 2005 है। बस यही से मामला बिगड़ गया। खातेदार ने अपनी खसरा संख्या 4075 पर मालिकाना हक जाता दिया तथा इसके दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए। वहीं सिविल न्यायाधीश, उपखंड मजिस्ट्रेट, एडीएम मजिस्ट्रेट के समक्ष स्टे आर्डर ले लिया। जबकि पीड़ित हरिराम का दावा है कि जहां नगर पालिका मंडल ने सामुदायिक भवन बनाया है। वह खसरा भी उसके रिकॉर्ड में दर्ज है। खुद सिविल कोर्ट की मौका कमिशनर रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है। कुल मिलाकर यह मामला नगर पालिका मंडल की मनमानी की वजह से बिगड़ा था। अब प्रशासन चाहकर भी यहां खसरा नंबर 4075 पर नया मार्ग व सड़क नहीं बना सकता। इसकी वजह है कि परिवादी ने उक्त खातेदारी की जमीन पर स्टे आर्डर लिया हुआ है। मजबूरन सड़क दिनों दिन क्षतिग्रस्त होती जा रही है तथा ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। ऐसे में परिवादी की केवल यही मांग है कि उसकी 28 बीघा 17 बिस्वा जमीन नाप कर दे दी जाए तो उसे किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं है।
यदि उन्हें पूरी जमीन नापकर दे दी जाए तो वह खसरा संख्या 4075 खाते में होने के बावजूद रास्ते के लिए छोड़ देंगे। लेकिन प्रशासन इस नाप को पूरा करने में असमर्थ हो रहा है। प्रशासन ने कई बार भूमि माप करने की कोशिश की, लेकिन परिवादी ने इस पर असंतोष जाता दिया। वहीं सामुदायिक भवन की भूमि का प्रकरण भी रिवेन्यू बोर्ड में लंबित है। जिस पर परिवादी ने स्टे आर्डर लिया हुआ है। लिहाजा जाहिर हो रहा है कि जब तक समीप का खातेदार संतुष्ट नहीं होगा। यह मसला निस्तारित होता नजर नहीं आ रहा है।


