‘नए पर दांव’: कांग्रेस-भाजपा के 70 प्रत्याशियों में अधिकांश नए चेहरे
Deoli News 31 अगस्त (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) देवली नगर पालिका में रणभेरी बज चुकी है। नामांकन के आखरी दिन कांग्रेस और भाजपा ने शहर के सभी 35 वार्डो पर अपने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
टिकट को लेकर मचे घमासान के बाद जो परिणाम सामने आया, उसमें खास बात ये रही कि पिछले बोर्ड के 25 पार्षदों में से अबकी बार केवल तकरीबन 8 नेता ही दुबारा टिकट हासिल करने में सफल रहे। कहने का तात्पर्य ये है कि अबकी बार दोनों ही दलों ने नए उम्मीदवारों को मौका दिया है। गौरतलब रहे कि नए परिसीमन के मुताबिक शहर में 10 नई सीटे बढ़ी है। इस तरह अब सीटे 25 से बढ़कर 35 हो गई है। इन 35 सीटों में कांग्रेस ने करीब-करीब आधा दर्जन बड़े राजनीतिक क्षत्रियों को दुबारा टिकट दिया है। जबकि भाजपा ने 2 नेताओ को दुबारा टिकट दिया है, दोनों दलों के 70 उम्मीदवारों में से 85 फीसदी प्रत्याशी नए भी है और युवा भी है। शायद देश मे चले जेनजी आंदोलन का ही ये असर है कि दोनों दलों ने नए ओर युवा प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। कांग्रेस में जिन पुराने क्षत्रियों को टिकट दिए है, उनमें मुख्य तौर पर भीमराज जैन, विनोद पुजारी, सौरभ जिंदल, प्रीतपाल कौर, रामनिवास मीणा जैसे नेता शामिल है, जो शहर में अपना दबदबा रखते है।
जबकि भाजपा ने निवर्तमान पालिकाध्यक्ष नेमीचंद जैन, संजय सिंहल है, जो पिछले बोर्ड में भी निर्वाचित हुए थे। इनके अलावा यदि दोनों पार्टियों में से कोई प्रत्याशी सामने आया हैं तो वह पुराने कैंडिडेट के परिजन हो सकते हैं। हालांकि दोनों दलों के टिकट वितरण के बाद स्थिति इसलिए साफ नही है कि टिकट नही मिलने का अंदाजा होते ही कई वार्डों से कई पुराने चेहरों के प्यादों ने निर्दलीय तौर पर नामांकन भर दिए है। लिहाजा जब तक दोनों दलों को इस स्थिति पर नियंत्रण नही पाया जाता। तब तक ये कतई नही कहा जा सकता कि शहर में कांग्रेस और भाजपा में सीधी टक्कर होगी। नामांकन वापस लेने के बाद हालांकि स्थिति साफ होगी। लेकिन ये तय है कई वार्डो में निर्दलीय प्रत्याशी दोनों पार्टियों के समीकरणों को प्रभावित करेंगे और मुकाबला बहुकोणीय हो सकता है।
चेयरमैन की सीट जनरल नही होने से दोनों दलों के पास रहा आवेदकों का टोटा!
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पालिका चुनाव में अबकी बार चेयरमैन की सीट के एससी के लिए आरक्षित होने से शहर में चुनाव लड़ने को लेकर पुराने नेताओं में उतना उत्साह नही दिखाई दिया। लेकिन दूसरी ओर ये भी कहा जा रहा है इन्ही हालातों के चलते कई वार्डो में आवेदको का टोटा नजर आया। उक्त हालातों के चलते पार्टियों को कम संख्या में आए आवेदनो पर ही विचार करना पड़ा। सूत्रों ने बताया कई वार्डो में तो आवेदक बहुत कम थे। मजबूरी में पार्टियों को उन्हीं में से उम्मीदवार चुनने पड़े।



