थाना प्रभारी ने बताया मामला झूठा लग रहा है, फिर भी जांच करेंगे
Deoli News 3 अप्रैल (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) राज्य सरकार व प्रशासन चाहे कितने भी नियम अवैध बजरी को रोकने के लिए क्यों ना बना ले, लेकिन निचले स्तर के अधिकारी व कर्मचारी इन कानून व नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
मंगलवार रात देवली थाना पुलिस के दो पुलिसकर्मियों को बजरी की ट्रैक्टर ट्रॉली की एस्कॉर्ट करते हुए देखा गया। जहां पुलिसकर्मी स्वयं बजरी की ट्रैक्टर ट्राली के आगे चल रहे थे। एक मीडियाकर्मी की ओर से रोके जाने के बाद पुलिसकर्मी घबरा गए। थाना प्रभारी राजकुमार नायक के निर्देश पर सहायक उपनिरीक्षक दिलीप सिंह पुलिस जीप के मौके पर पहुंचे तथा बजरी की ट्रैक्टर ट्राली को जब्त किया।
यह है मामला
दरअसल मंगलवार रात करीब 9 बजे बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली बस स्टैंड के निकास द्वार से विवेकानंद कॉलोनी तहसील के पास होते हुए जा रही थी। देखा गया कि ट्रैक्टर ट्राली का आगे एक बाइक पर दो पुलिसकर्मी चल रहे थे। वही उनके साथ दो युवक रैकी के लिए भी चल रहे थे। यह ट्रैक्टर ट्रॉली एक मकान के बाहर आकर रुक गई।
वहीं उसके साथ चल रहे लोग भी रुक चुके थे। इस दौरान एक मीडियाकर्मी आए। जिन्होंने यह पूरा वाकया देखकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया। शुरुआत में पुलिसकर्मियों ने मीडिया को वीडियो बनाने से रोका और कहा कि यह वीडियो क्यों बना रहे हो। इस पर युवक ने अपना परिचय देते हुए कहा कि वह मीडियाकर्मी है तथा कवरेज कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मीडियाकर्मी ने थाना प्रभारी राजकुमार नायक को फोन किया। उनके निर्देश पर देवली पुलिस मौके पर पहुंची। इस दौरान ट्रैक्टर ट्राली में चढ़े एक होमगार्ड ने बजरी मौके पर ही खाली करने की कोशिश की, ताकि सबूत मिट सके। जिसका विरोध करने पर होमगार्ड को रोका गया। बाद में पुलिस ट्रैक्टर ट्रॉली व चालक को अपने साथ थाने ले गई। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
मामला पूरी तरह झूठ लग रहा है
थाना प्रभारी राजकुमार नायक का कहना है कि उन्होंने पूरे मामले को जाना है। यह मामला झूठ लग रहा है पुलिसकर्मियों ने ही देवली थाना पुलिस को बजरी के ट्रैक्टर ट्राली चलाने की सूचना दी थी। रात को मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक को मामले की जानकारी दे दी है। होमगार्ड से गलती से लिफ्ट का लीवर दब गया था। वह बजरी खाली नहीं कर रहा था। यह पुलिसकर्मी प्यारेलाल व फूलचंद है।
यह उठते हैं सवाल?
दरअसल मामले में थाना प्रभारी का कहना है कि उन्होंने प्रकरण की जांच की है। संबंधित पुलिसकर्मियों ने उन्हें बताया कि वह बजरी की ट्रैक्टर ट्राली का ही पीछा कर रहे थे। उन पुलिसकर्मियों ने ही थाने को सूचना दी थी। जबकि यह ट्रैक्टर ट्रॉली आराम से चलते हुए निकल रही थी और आगे पुलिसकर्मी चल रहे थे। यदि पुलिस उनको रोकना चाहती तो किसी भी जगह रोक लेती। वही मौके पर ट्रैक्टर ट्राली रुक जाने के बावजूद चालक आराम से सीट पर बैठ रहा तथा उसकी जगह पुलिसकर्मी पत्रकार से बहस करने लग गए। यदि पुलिस बजरी वाहन को रोक रही थी तो उन्हें वीडियो बनाने से क्या आपत्ति थी, क्योंकि पुलिस भी तो लीगल कार्रवाई कर रही थी।
ऐसे में वीडियो बनने से उन्हें क्या डर था। इस दौरान एक पुलिसकर्मी ने कहा कि जाने दो गरीब लोगों को क्यों रोकते हो। दूसरी बात यदि होमगार्ड ट्रैक्टर चलाना नहीं जानता था तो पुलिस ने उसे आखिर क्यों सीट पर बैठाया। यदि होमगार्ड को लीवर व गियर में अंतर मालूम नहीं है तो उसे स्टेरिंग नहीं सौपनी चाहिए। इसके अलावा जब तक मीडियाकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। तब तक पुलिसकर्मी फोन पर किन्हीं लोगों से आराम से बात कर रहे थे तथा ट्रैक्टर चालक सीट पर आराम से बैठा था। यह सवाल इस बात की ओर इशारा कर रहेगी पुलिसकर्मियों की स्वीकृति की वजह से ट्रैक्टर चालक को कोई चिंता नहीं थी। समूचा मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने ट्रैक्टर चालक व वाहन को जब्त कर लिया है।



