Wednesday, April 22, 2026
No menu items!
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeAdministrationपुलिस व प्रशासन की सख्ती बनी माफियाओं के लिए मुनाफे का जरिया

पुलिस व प्रशासन की सख्ती बनी माफियाओं के लिए मुनाफे का जरिया

  • बजरी की किल्लत और बढ़ते दाम

  • प्रशासन की सख्ती, बजरी माफिया की मस्ती

  • पुलिस और प्रशासन भी ड्यूटी को मजबूर


Deoli News 17 जनवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) जिले व देवली में इन दिनों पुलिस व प्रशासन द्वारा अवैध खनन के खिलाफ अपनाई जा रही कड़ी सख्ती का सीधा असर निर्माण कार्यों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। पिछले कई दिनों से बजरी की आपूर्ति पर लगी रोक के कारण इसके दाम अब सोने-चांदी की तरह बढ़ते जा रहे हैं।

जिससे आमजन के लिए अपने घर का निर्माण कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है। वहीं दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन नियमों की पालना करने में जूटा है। यदि पुलिस प्रशासन नियमों की पालना नहीं कराए तो उन्हें उच्च अधिकारियों की कार्रवाई झेलनी पड़ रही है। लिहाजा हर ओर मरण केवल आमजन का है। एक तरफ जहां पुलिस की नाकेबंदी और गश्त तेज है, वहीं दूसरी ओर इसी सख्ती की आड़ में बजरी माफिया अपनी मनमानी पर उतारू हैं और आमजन से मनचाहे दाम वसूल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों डीजीपी राजस्थान और टोंक एसपी ने बजरी माफिया उसे मिलीभगत करने वाले कई पुलिस कर्मचारियों को निलंबित किया था। इसके बाद से पुलिस और प्रशासन बजरी खनन व परिवहन रोकने के लिए सख्त दिखाई दे रही है।

लोगों ने बताया कि बजरी पर लगी इस रोक और प्रशासन की कड़ाई के चलते अब एक ट्रैक्टर-ट्रॉली बजरी की कीमत 6 से लेकर 8 हजार रुपए तक पहुंच गई है, जो दिनों दिन बढ़ती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस प्रशासन की यह कार्रवाई माफियाओं के हौसले पस्त करने के बजाय उन्हें मोटा मुनाफा कमाने का अवसर दे रही है। माफिया प्रशासन के डर और रिस्क का हवाला देकर जरूरतमंद लोगों को महंगी दरों पर बजरी खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इससे निर्माण कार्य की लागत काफी बढ़ गई है और आम आदमी का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। इस पूरे संकट के पीछे बजरी को लेकर सरकार की किसी स्पष्ट नीति का न होना और ढुलमुल रवैया भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

सरकार द्वारा खनन को लेकर ठोस निर्णय नहीं लेने की वजह से ही आम जनता पर आर्थिक भार बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। मजबूरन लोगों को भारी-भरकम राशि देकर बजरी खरीदनी पड़ रही है, ताकि उनके रुके हुए निर्माण कार्य पूरे हो सकें।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

%d