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HomeDainik Bureau Deskपूर्ण चंद्रग्रहण मंगलवार को : जप, दान, ध्यान का रहेगा महत्व

पूर्ण चंद्रग्रहण मंगलवार को : जप, दान, ध्यान का रहेगा महत्व


Deoli News 23 फरवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) पूर्ण चंद्र ग्रहण फाल्गुन शुक्ला पूर्णिमा मंगलवार 3 मार्च को घटित होगा। चन्द्रोदय के समय यह ग्रहण सम्पूर्ण भारत में शुभारंभ से अन्त तक सभी स्थानों में पूर्ण एवं आशिक दिखाई देगा।

इस ग्रहण का सुतक 9 घंटे पहले यानि सुबह 6.20 बजे से शुरू हो जाएगा। उपच्छाया प्रवेश दोपहर 02.13 ग्रहण प्रारम्भ स्पर्श दोपहर 03.20 बजे से पूर्णता प्रारम्भ शाम 4.34 ग्रहण का मध्य सायंकाल 5.05 बजे, पूर्णता समाप्त शाम 5.33 बजे ग्रहण मोक्ष सायंकाल 6.48 बजे उपच्छाया का अंत सायंकाल 07.55 बजे होगा। ग्रहण की अवधि 3 घन्टा 28 मिनट की होगी। मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध सस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि स्थानीय जयपुर मे चंद्रोदय सायंकाल 6.39 बजे होगा एवं ग्रहण समाप्त मोक्ष 6.48 बजे होगा। यहां पर ग्रहण की उपच्छाया का अंत दिखाई देगा, जो ग्रहण काल समय 19 मिनट का रहेगा।

ग्रहण के सभी चरण दिखेंगे

यह पूर्ण चंद्रग्रहण सम्पूर्ण भारत के सभी हिस्सो में वहां के चंद्रोदय समय के अनुसार दिखाई देगा। पूरे देश मे ग्रहण की शुरुआत से लेकर अंत तक उपच्छाया सहित ग्रहण के सभी चरण दिखेगे। भारत के अलावा यह ग्रहण पूर्वी एशिया प्रशांत महासागर आस्ट्रेलिया एवं अमेरिका के क्षैत्रो मे दिखाई देगा। अर्जेटिना पैराग्वे के कुछ हिस्से बोलिविया ब्राजील ग्रीनलैण्ड एवं उतरी अटलांटिक महासागर मे उपच्छाया प्रवेश का प्रारंभिक चरण चन्द्रास्त के समय दिखाई देगा। शास्त्री ने बताया कि पूर्णिमा तिथि सूर्योदय से सायंकाल 5.07 बजे तक है, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र सुबह 7.31 बजे से सम्पूर्ण रात्रि‌ सिंह राशि का चन्द्रमा रहेगा।

ग्रहण के दौरान यह करें उपाय

ग्रहण के सुतक एवं ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, पाठ, मन्त्र जाप तीर्थ, स्नान, ध्यान, हवन आदि करना यथाशक्ति जप पाठ ग्रह शांति एवं उपाय करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दर्शन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय में इष्ट देव का मंत्र जाप, गुरु का दिया हुआ मंत्र जाप, गायत्री मंत्र महामृत्युंजय मंत्र विष्णु सहस्रनाम, गोपाल सहस्रनाम, नारायण मंत्र के जाप करने से अनिष्टों का नाश होता है, स्वयं विष्णु भगवान का वचन है कि ग्रहण के समय में दिया हुआ दान अनाज, फल, वस्त्र, सोना-चांदी, बर्तन दक्षिणा के दान को पुण्यदायिनी बताया है।

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