नेत्रहीनों को मिलेगी रोशनी
Deoli News 15 जून (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर में शनिवार देर रात माल मोहल्ला निवासी नितिन मंगल की माता सावित्री मंगल का आकस्मिक निधन हो गया। दरअसल उक्त महिला 3 वर्ष पहले अपने परिवार की सदस्य सीता कुमारी के निधन पर उनके नेत्रदान से प्रेरित हुई थी।
वहीं महिला ने पुत्र नितिन, बेटी नेहा और मेघा को अपनी मृत्यु के बाद नेत्रदान करने की बात कही थी। महिला के निधन के बाद नितिन को अपनी माता की यह इच्छा देर रात को 2 बजे ध्यान में आई। उन्होंने रात 3 बजे शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ से कोटा में संपर्क किया। डॉ. गौड़ स्वयं नेत्रदान वाहिनी को लेकर डेढ़ घंटे में पहुंच गए और परिवार की सभी सदस्यों के बीच में नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की। नैत्रदान प्रक्रिया के बाद घर में उपस्थित सभी रिश्तेदारों को डॉ. गौड़ ने नेत्रदान से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी दी।
ऐसे कर सकते है नेत्रदान
उन्होंने बताया कि 2 से 80 वर्ष तक की उम्र के स्वस्थ व्यक्ति का नेत्रदान मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे में और सर्दियों में 12 घंटे तक संभव है। शव को डीप फ्रिज या बर्फ की सिल्ली पर रखने पर भी 16 घंटे तक नेत्रदान संभव है। चश्मा लगे हुए और मोतियाबिंद के ऑपरेशन हो चुके व्यक्ति, थाइरॉएड, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व हार्ट के मरीज का भी नेत्रदान संभव है। नेत्रदान में आँख के ठीक सामने का पारदर्शी हिस्सा जिसे पुतली (कॉर्निया) लिया जाता है न कि पूरी आँख को।



