Deoli News 19 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) श्रीमद्भागवत कथा के कथा के तीसरे दिन वामन अवतार व नरसिंह अवतार कथा सुनाई गई। पं योगेश शास्त्री ने बताया कि सतयुग में असुर बलि ने देवताओं को पराजित करके स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया।
इसके बाद सभी देवता भगवान विष्णु के मदद मांगने पहुंचे। तब भगवान विष्णु ने देवमाता अदिति के गर्भ से वामन रूप में अवतार लिया। वहीं राजा बलि ने वामनदेव को तीन पग धरती दान में देने का वचन दे दिया। इसके बाद वामनदेव ने विशाल रूप धारण किया। इसी प्रकार नृसिंह अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि नृसिंह न पूरी तरह से मानव थे और न ही पशु। हिरण्यकश्यप का वध करते समय नृसिंह ने उसे अपनी जांघ पर लिटाया, इसलिए वह न धरती पर था और न आकाश में था। उन्होंने अपने नाखून से उसका वध किया, इस तरह उन्होंने न तो अस्त्र का प्रयोग और न ही शस्त्र का। यह सब इस वजह से करना पड़ा, क्योंकि हिरण्यकश्यप को वरदान था। इसी दिन को नृसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। लोगों ने कथा के यजमान शशि कुमार हावा व कथावाचक शास्त्री का मालार्पण कर साफा बंधाकर स्वागत किया।
इस दौरान राजेंद्र शर्मा, सत्यनारायण सरसडी, रमेश चंद्र शर्मा, राधेश्याम शर्मा, कैलाश पंचोली समेत थे। इस मौके पर भगवान नरसिंह की जीवंत झांकी बनाई गई।


