Saturday, April 18, 2026
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श्वास नली कटी, फेफड़ों में जाने लगा था खून, एंडोट्रेकिमल ट्यूब डालकर चिकित्सकों ने दी ऑक्सीजन

  • ऑपरेशन थिएटर की कहानी, चिकित्सकों की जुबानी

  • चिकित्सकों की टीम की मेहनत से बची लाल सिंह की जान

  • फेफड़ों में खून चला जाता तो हो सकती थी परेशानी


@ आशीष बागड़ी

Deoli News 2 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर में बुधवार को सब्जी बनाने के चाकू से देवली निवासी लाल सिंह ग्वाला का गला काटने का सनसनीखेज मामला सामने आया। घटना के बाद पीड़ित लाल सिंह ने भी स्वयं का आत्मविश्वास नहीं गिरने दिया तथा अपना फोन निकाल कर घटना की परिचित को जानकारी दी।

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जिससे कि समय रहते पीड़ित को उपचार मिल सका। लेकिन उक्त समूचे घटनाक्रम में देवली के राजकीय चिकित्सालय की चिकित्सकों की टीम ने लाल सिंह की जान बचाने में कड़ी मेहनत की है। जिनकी बदौलत पीड़ित की जान बच सकी तथा उनका फिलहाल जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में उपचार चल रहा है। ऐसे में चिकित्सकों की उक्त टीम धन्यवाद की पात्र है। जिन्होंने मेहनत कर जान बचाई। यह अलग बात है कि आरोपी कब तक पुलिस से बचकर भागेंगे, लेकिन पीड़ित की जान बचना समूचे मामले में सबसे महत्वपूर्ण है।

श्वास नली 10×5 सेंटीमीटर कट चुकी थी, जान बचाना था चुनौती

चिकित्सक गोपाल मीणा, प्रतीक चौधरी, नवल किशोर व नर्सिंग ऑफिसर लक्ष्मी निधि शर्मा ने बताया कि हमले के घायल लालसिंह को सुबह करीब 11 बजे देवली चिकित्सालय में लाया गया। उन्होंने बताया कि इस दौरान डॉ. गोपाल लाल अपने चिकित्सा कक्ष में थे। जबकि डॉ. नवल किशोर, नर्सिंग ऑफिसर लक्ष्मी निधि तथा स्त्री रोग विशेषज्ञ एक महिला की डिलीवरी कर फ्री हुए थे। डॉ. गोपाल घायल लाल सिंह को तत्काल ऑपरेशन थिएटर में लेकर आए। जहां डॉ. गोपाल नवल किशोर व लक्ष्मीनिधि ने इलाज शुरू किया। वही सूचना पर ईएनटी चिकित्सक प्रतीक चौधरी भी तत्काल ऑपरेशन थिएटर पहुंचे। जहां प्राथमिक पड़ताल पर देखने में श्वास नली काफी कटी हुई मिली। श्वास नली के कट का आकार करीब 10×5 सेंटीमीटर था। वही स्वर यंत्र को भी नुकसान हुआ तथा ब्लड भी काफी बह चुका था।

ईटी ट्यूब लगा कर दी ऑक्सीजन

प्राथमिक उपचार शुरू करने के दौरान चिकित्सकों ने देखा कि लाल सिंह की श्वास नाली काफी कट चुकी थी। जिसमें ब्लड जाने लगा था। हालांकि ब्लड बहने से जान को खतरा कम था। लेकिन यह ब्लड श्वास नली के माध्यम से फेफड़ों में चला जाता तो जीवन को खतरा हो सकता था। इस पर चिकित्सकों ने ईटी ट्यूब (एंडॉट्रेकेमिकल ट्यूब) के जरिए घायल को ऑक्सीजन दी तथा प्राथमिक उपचार शुरू किया। इस ट्यूब की मदद से ऑक्सीजन सीधी श्वास नली में चली गई। इसी तरह स्वर यंत्र को भी चोट पहुंची। जिस पर भी चिकित्सकों ने टांके लगाए तथा इन्हें दुरुस्त किया। चिकित्सकों ने बताया कि उक्त प्रक्रिया में उन्हें करीब सवा घंटा लगा। लेकिन उपचार के दौरान जहां लालसिंह बोल नहीं पा रहे थे। वही प्राथमिक उपचार के बाद वह बोलने लगे। जिससे चिकित्सकों का उत्साह बढ़ा। लेकिन उन्होंने लाल सिंह को बोलने से मना कर दिया। इस दौरान चिकित्सकों की टीम ने घायल लाल सिंह को ऑक्सीजन लगे तथा अतिरिक्त ब्लड दिया। गले पर हुए घाव के इलाज में (ईएनटी) चिकित्सक प्रतीक चौधरी का सहयोग मिला। 

स्वास्थ्य जानकर हुई खुशी

चिकित्सकों को जब यह मालूम पड़ा कि घायल लाल सिंह का बुधवार रात ऑपरेशन हुआ है तथा जयपुर के चिकित्सकों ने उन्हें फिलहाल खतरे से बाहर बताया है। ऐसे में देवली के चिकित्सकों में खुशी है कि उनके प्रयास से यह जान बची है। वहीं परिजन भी इन चिकित्सकों के शुक्रगुजार है। 

यहां से देखें पूरी खबर

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