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Homeविधानसभा चुनाव 2023हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में " चांदना" को पहली दफे कड़ी चुनौती!

हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में ” चांदना” को पहली दफे कड़ी चुनौती!

राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार

Desk news. 10 नवम्बर ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) वर्ष 2013 व 2018 में आसानी से चुनाव जीतकर मंत्री बने कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक चांदना पहली बार कड़ी चुनौती का सामना कर रहे है। ये चुनौती उन्हें पूर्व कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी से मिल रही है, जो 2008 के बाद हिंडोली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे है।

उल्लेखनीय है वर्ष 2013 में जब पहली बार अशोक चांदना कांग्रेस से मैदान में उतरे तो उनका मुकाबला बीजेपी के महिपतसिंह हाड़ा से था। तब चांदना करीब 18 हजार मतों से चुनाव जीते। दूसरी बार 2018 के चुनावों में फिर चांदना कांग्रेस के टिकट पर उतरे तो इस बार बीजेपी ने महिपत सिंह के स्थान पर उनके पुत्र ओमेंद्र सिंह को टिकट दिया। लेकिन अशोक चांदना ने बीजेपी के ओमेंद्र सिंह को करीब 31 हजार वोटों से शिकस्त दी। बीते दो चुनावों में लगातार जीत से चांदना हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में ” बाहुबली” बनकर उभरे। उक्त विधानसभा क्षेत्र में उनको चुनौती देने वाला उम्मीदवार नही था। इस बार बीजेपी ने लगातार दो बार हार चुके क्षेत्रों पर पूरा फोकस किया और माली- गुर्जर बहुल इलाके में पूर्व कृषि मंत्री डॉ. सैनी को टिकट दिया। सैनी पहले भी 2008 में चुनाव जीत चुके है।

हिंडोली विधानसभा क्षेत्र के जातिगत समीकरणों में माली मतदाताओं की संख्या 55 हजार है तो गुर्जर मतदाताओं की संख्या भी लगभग इतनी है। करीब 70 हनार एससी मतदाताओं, 25 हजार मीणा मतदाताओं के अतिरिक्त ब्राह्मण, महाजन, ओबीसी मतदाता भी है। रिकॉर्ड के अनुसार 1951 से 2018 तक हुए 15 चुनावों में कांग्रेस के 9 बार उम्मीदवार चुनाव जीते है। जबकि 6 बार गैर कांग्रेसी उम्मीदवार जीते है। 2008 में एक बार उपचुनाव भी हुआ। कृषि आधारित विधानसभा क्षेत्र में कोई बड़ा उधोग नही है।

पूर्णरूपेण खेती पर निर्भर किसान बहुल इलाके में इस बार बीजेपी के पूर्व कृषि मंत्री सैनी मैदान में है। माली मतदाताओं की बड़ी संख्या के कारण व अन्य जातियों के समर्थन से सैनी चांदना के समक्ष कड़ी चुनौती दे रहे है। कुल मिलाकर कहे तो कांग्रेस उम्मीदवार के समक्ष अपनी सीट बरकरार रखने की भारी चिंता है। विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान ” हवा का रुख” बदलता प्रतीत हो रहा है। दीपावली के पर्व के कारण हालांकि अभी दोनो ही दलों के उम्मीदवारों का गांवों में जनसम्पर्क पर जोर है लेकिन चुनावों का माहौल अभी छाना बाकी है। चर्चाओं के दौर में लोग कहते नजर आते है कि इस बार चांदना को पसीने आ सकते है।

चुनाव का माहौल दीपावली के बाद बनेगा और 15 नवम्बर के बाद धीरे धीरे विधानसभा क्षेत्र की स्थिति साफ होनी शुरू हो जाएगी। पहली बार चांदना आरामदायक पोजीशन से काफी दूर है।

Dainik Bureau Desk
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