बीजेपी का गुर्जर फैक्टर कामयाब नहीं
राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार
Desk News 11 नवंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) कांग्रेस हो या बीजेपी दोनो दलों ने पूरे राज्य में जाति फैक्टर को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार उतारे है। ये बात अलग है कि इनमें कितने जीतने में सफल होंगे और कितने विफल। बीजेपी ने भी गुर्जर वोटों का अपने पाले में धुर्वीकरण करने की बीजेपी की कोशिश नगण्य साबित हुई है।
देवली-उनियारा, हिंडोली, जहाजपुर, टोंक विधानसभा सीटों का रुझान देखें तो समझ मे रहा है कि गुर्जर वोटो का केवल उन्हीं के जाति से खड़े पार्टी उम्मीदवारों की तरफ साफ तौर पर झुकाव दिख रहा है। ऐसे में गुर्जर आंदोलन के बड़े नेता कर्नल किरोडीलाल बैंसला के पुत्र विजय बैंसला को देवली- उनियारा विधानसभा सीट से टिकट देने का असर सटे जहाजपुर, हिंडोली व टोंक विधानसभा क्षेत्रों में नही दिख रहा है। देवली-उनियारा में बीजेपी ने बैंसला को टिकट दिया है।
जबकि जहाजपुर, टोंक, हिंडोली समेत तीनो सीटो पर कांग्रेस ने गुर्जर उम्मीदवारों को टिकट दिया है। ऐसे में साफ जाहिर है कि बीजेपी जिस गुर्जर फेक्टर को भुनाना चाहती थी, उसमें वह विफल रही है। देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र से सटी हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में गुर्जर मतदाताओं का सीधा रुझान कांग्रेस प्रत्याशी अशोक चांदना की और दिखाई दे रहा है। जबकि देवली-उनियारा में बीजेपी के बैंसला व कुछ झुकाव दूसरे गुर्जर प्रत्याशी विक्रमसिंह की और दिखाई देता है। टोंक विधानसभा सीट पर गुर्जर मतदाताओं का रुख कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट की तरफ नजर आ रहा है। यही कमोवेश हालत जहाजपुर विधानसभा क्षेत्र की है। यहाँ भी गुर्जर मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस प्रत्याशी धीरज गुर्जर की तरफ दिखाई दे रहा है। उक्त रुझान से स्पष्ट है कि गुर्जर मतदाता अपनी जाति के उम्मीदवारों की और धुर्वीकरण करते नजर आते है।
इससे साफ प्रतीत होता है कि सचिन पायलट के फेक्टर को रोकने में बीजेपी विफल रही है। जबकि बैंसला को देवली-उनियारा से उतारने की रणनीति पायलट के प्रभाव, असर को संतुलित करने की थी। देवली-उनियारा, हिंडोली, जहाजपुर विधानसभा क्षेत्रों में गुर्जर, मीणा बहुल मतदाता वाले क्षेत्र है। जहाँ विभिन्न पार्टी ने इन्हीं समीकरणो को ध्यान में रखते हुए टिकट देती आई है। इस बार भी वहीं हुआ। इस महीने होने जा रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 11 व बीजेपी ने 10 गुर्जर उम्मीदवारों को पार्टी के टिकट दिए है।
जबकि कांग्रेस ने राजपूतों को 17, बीजेपी ने 20, ब्राह्मणों को कांग्रेस ने 16, बीजेपी ने 20, महाजन समुदाय को कांग्रेस – बीजेपी ने 11-11, माली जाति को कांग्रेस ने 4, बीजेपी ने 3 , जाट जाति को कांग्रेस ने 36 व बीजेपी ने 33 टिकट दिए है। खास बात ये है कांग्रेस ने मुस्लिम समुदाय को 15 टिकट दिए। जबकि बीजेपी ने एक भी टिकट नही दिया।


