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भाजपा प्रत्याशी भीतरघात से हारे या बट गए वोट!


Deoli News 5 दिसंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) स्थानीय विधानसभा में हुए हाल ही में चुनाव में भाजपा प्रत्याशी विजय बैसला को कांग्रेस प्रत्याशी हरिश्चंद्र मीना से 19 हजार से अधिक मतों से शिकस्त मिली है। एक ओर जहां संगठन में चर्चा का विषय है। वही इस बात का भी मंथन जरूरी है कि आखिर किस वजह से भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।

उल्लेखनीय की इस बार स्थानीय विधानसभा में मुख्य तौर पर तीन प्रत्याशी सामने आए हैं। स्वाभाविक तौर पर भाजपा व कांग्रेस में आमने-सामने का मुकाबला था। लेकिन इन दोनों प्रत्याशियों को आरएलपी प्रत्याशी डॉ. विक्रम सिंह गुर्जर ने चुनौती दे रहे थे। उनके समर्थक जीत का दावा तक कर रहे थे। लेकिन विक्रम सिंह गुर्जर 19773 वोट ही प्राप्त कर सके। अब रही बात भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच की। जहां कांग्रेस प्रत्याशी हरिश्चंद्र को 105001 मत मिले। जबकि भाजपा प्रत्याशी को 85826 मत मिले। पार्टी में हार के बाद इस बात को लेकर भी चर्चा है कि आखिर किस वजह से भाजपा प्रत्याशी हारे है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रमुख तौर पर भीतरघात को मुख्य कारण माना जा रहा है। उनका कहना है कि कई बड़े नेता इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के साथ मन से नहीं लगे। वह केवल ऊपरी तौर पर साथ रहे। इनमें वह नेता भी शामिल हो सकते हैं, जो टिकट में की दौड़ में शामिल थे। हालांकि इसका मंथन पार्टी ही कर सकती है। परस्पर फूट व एकता के अभाव में भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा, यह पार्टी के नेता भी दबे स्वर में स्वीकार कर रहे हैं। उधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तीसरी प्रत्याशी के तौर पर सामने आए आरएलपी प्रत्याशी की वजह से भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इसकी वजह समाज के वोटो का विभाजन होना बताया जा रहा है। बता दे कि मतगणना के दौरान आए नतीजे में स्पष्ट है कि देवली ब्लॉक में भाजपा प्रत्याशी को लीड मिली है। जबकि उनियारा ब्लॉक में कांग्रेस प्रत्याशी हरिश्चंद्र को बढ़त प्राप्त हुई। करीब 9 से 11 राउंड तक भाजपा प्रत्याशी लगातार बढ़त लिए हुए थे।

लेकिन इसके बाद उनियारा ब्लॉक की हुई मतगणना में विजय बैसला हारते चले गए। इसके अलावा भी कई विकल्पों पर हार का ठीकरा फूट रहा है। ऐसे कई नेता है, जो नहीं चाहते थे कि बैसला चुनाव जीते। इससे उनका राजनीतिक भविष्य खत्म हो सकता था। लिहाजा वे साथ नहीं लगे।

पिता पुत्र दोनों हारे

गौरतलब है कि भाजपा प्रत्याशी विजय बैसला से पूर्व उनके पिता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला यहां की स्थानीय सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके। जिन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि उसे दौरान कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला, पूर्व केंद्रीय मंत्री नमो नारायण मीणा से बहुत कम अंतर से हारे थे। जबकि किरोड़ी सिंह बैंसला के पुत्र विजय बैसला नमोनारायण मीणा के भाई हरिश्चंद्र मीना से हारे।

Dainik Bureau Desk
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