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अयोध्या कार सेवा में आंवा के कारसेवक भी नहीं रहे पीछे

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा विशेष :1990

(साभार- सुरेंद्र सिंह नरूका)


Deoli News 16 जनवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लोग उत्साहित नजर आ रहे हैं। वस्तुत यह दिन समर्पित होना चाहिए, उन कारसेवकों के संघर्ष को, जिन्होंने रामकाज के लिए युवावस्था में अपने घर परिवार छोड़कर सरकार से लोहा लिया और जेल में भी रहे। इसके उदाहरण है दूनी तहसील के आँवा गांव से अयोध्या पहुंचने वाले चार-चार रामभक्त कारसेवक।

दरअसल यहां से चार रामभक्त कारसेवक 1990 एवं 1992 में अलग-अलग समय अयोध्या पहुंचे। जिनमे यहां से 30 अक्टूबर 1990 में रामलाल गुर्जर, लक्ष्मण सिंह सोलंकी व गोपीकृष्ण वैष्णव तथा 6 दिसंबर 1992 को गणेश दाधीच व गोपीकृष्ण वैष्णव अयोध्या कारसेवा में पहुंचे। उस समय के संघर्ष की कहानियां आज भी जब गांव में इनकी जुबानी सुनते है तो रोमांचित हो उठते हैं। यह बताते है कि आसपास के सभी कारसेवक देवली से दिवंगत दामोदर प्रसाद शर्मा व तत्कालीन विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष दिनेश गौतम के नेतृत्व में अयोध्या गए थे। कारसेवक रामलाल गुर्जर बताते है कि वे 1990 में 25 अक्टूबर को दूनी व आसपास के रामभक्तो के साथ अयोध्या के लिए रवाना हुए थे, लेकिन फैजाबाद स्टेशन के पास उन्हें साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में ये फतेहगढ़ जेल में रहे। उस समय मुलायम सिंह सरकार ने कारसेवकों पर गोलियां चलाई और सैकड़ो कारसेवक रामजन्म भूमि पर पहुंचकर राम के काम आ गए। लेकिन उस समय रामजन्म भूमि पर कारसेवको ने भगवा झंडा अवश्य गाड़ ही दिया था।

उस वर्ष जेल में ही हुई थी दीवाली

1990 में अयोध्या गए आवा निवासी कारसेवक लक्ष्मण सिंह सोलंकी बताते है कि वे मरवासी सरकारी सेवा में थे और 26 अक्टूबर को जहाजपुर से कार सेवा के लिए बस से रवाना हुए और मांडलगढ़ से ट्रेन द्वारा सहारनपुर पहुंचे थे। उन्हें कई बार 20 से 25 किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ा। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बरेली अस्थाई जेल में रखा। वहां से उन्हें बरेली सेंट्रल जेल में करीब बीस दिन बिताने पड़े। उस वर्ष दीवाली और देवउठनी एकादशी का त्यौहार भी जेल में ही आया था। बरेली जेल में उन्हें दैनिक जागरण समाचार पत्र पढ़ने को दिया जाता था। जिससे कारसेवको की खबरें पढ़ने को मिलती थी। गोली कांड के समय कारसेवकों की लाशों को रेत के बोरों से बांधकर सरयू में डाल दिया गया था। सैकड़ों रामभक्त अयोध्या से वापस नहीं लोट सके थे। मन में संकल्प कर लिया था रामजन्म भूमि पर अवश्य जाएंगे और स्थिति सामान्य होने पर वे अयोध्या पहुंच सके।
कंधे पर बिठा-बिठाकर ढांचे पर चढ़ाया था। अयोध्या गए 58 वर्षीय रामभक्त गणेश दाधीच भी कारसेवा में थे।

गोपाल मंदिर समिति द्वारा कार सेवको का किया जाएगा सम्मान

गोपाल मंदिर समिति के सुरेंद्र सिंह नरूका व किशन पारीक ने बताया कि आगामी 22 जनवरी को मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दिन गांव में दीवाली जैसा माहौल होगा तथा कारसेवकों का सम्मान समारोह आयोजित कर जुलूस निकाला जाएगा।

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