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रूस-यूक्रेन, इजरायल-हमास युद्ध के बाद लाल सागर तनाव से स्टोन उधोग पर गहरा असर पड़ा!

देवली के स्टोन उधोग पर मंडराया आर्थिक संकट
शिपिंग लाइन पर नियंत्रण की जरूरत


(राजेन्द्र बागड़ी)

Deoli News 4 फरवरी ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) दशकों से चल रहे देवली के स्टोन उधोग पर रूस-यूक्रेन, इजरायल-हमास युद्ध के बाद अब बढ़े लाल सागर में तनाव ने स्टोन उधोग पर गहरा असर डाला है। अव्वल तो युद्ध से पहले ही निर्यात पर बुरा असर पड़ा था, लेकिन अब लालसागर में बढ़े तनाव से कंटेनर का किराए ने ” कोढ़ में खाज ” जैसा असर डाल दिया है। जिससे स्थानीय स्टोन निर्यातकों की हालत पतली कर दी है। दूसरा बड़ा असर इस काम लगे लोगों को बेरोजगारी की और धकेल दिया है। उक्त दोनों ही पक्षों को हुए नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो गया है।

दरअसल स्लेट स्टोन के निर्यात के बाद बिजोलिया के सेंड स्टोन की विदेशों में मांग बढ़ी। जब तक स्थितियां ठीक थी, तब तक देवली, बिजोलिया, भीलवाडा, उदयपुर से हर रोज करीब 200 कंटेनर विदेशों को निर्यात होते थे। लेकिन जैसे ही रूस- यूक्रेन युद्ध के बाद इजरायल युद्ध चिड़ा तब से सेंड स्टोन उधोग पर भारी असर पड़ा। लालसागर में बढ़े तनाव के बाद तो मालवाहक जहाजों का किराया इतना महंगा हो गया कि उसे न तो आयातक वहन करना चाहता है और न निर्यातक वहन करना चाहता है। इन सब परिस्थितियों का असर ये हुआ कि आसपास के सभी सेंड स्टोन निर्यातकों की हालत बिगड़ गई। खासकर उधोग से जुड़े कारीगर, मशीनमैन, ऑपरेटर, कंटेनर, मजदूर, सुरक्षाकर्मियों की छटनी करनी पड़ी। परिणामस्वरूप हजारों लोग बेरोजगारी झेलने पर मजबूर है। ये हालात करीब दो बरस से बने हुए है।

वर्तमान में माल का उठाव नगण्य है। जहां पहले हर दिन 600 कंटेनर माल मालवाहक जहाजो के जरिए पश्चिमी देशों को जाता था, उस पर ब्रेक लग गया। इससे उत्पादन तो ठप्प हुआ ही। लेकिन निर्यात घटने से देश को विदेशी मुद्रा का भी नुकसान हुआ है। अकेले देवली शहर में सेंड स्टोन के 10 बड़े निर्यातक है। इस सब फैक्ट्रियों पर काम प्रभावित हुआ है। अब महीने में कुछ कंटेनर ही जा पा रहे है। अभी लालसागर में बढ़े तनाव के बाद शिपिंग कंपनियों ने निर्यातकों से मनमानी करते हुए भाड़ा बढ़ा दिया। पहले एक कंटेनर का औसत किराया 500 डॉलर से 600 डॉलर होता था, वह लालसागर के तनाव के बाद बढ़कर 1500 से 2000 डॉलर प्रति कंटेनर हो गया। इससे निर्यातकों की कमर टूट गई। एक स्थानीय निर्यातक व व्यवसायी ने बताया कि भारी भाड़े के कारण माल की लागत इतनी बढ़ गई है कि उसे निर्यात करना मुश्किल हो गया है।

लालसागर तनाव के कारण शिपिंग कम्पनियों ने इतना भाड़ा लाद दिया है, जिसके कारण निर्यात ठप्प पड़ा है। उधोग पर भारी दबाव के चलते केंद्र सरकार को सारी स्थितियों पर विचार करने की जरूरत है। विदेशी मुद्रा के नुकसान को रोकने के लिए केंद्र सरकार को शिपिंग कम्पनियों पर भी नकेल कसने की जरूरत है तो निर्यातकों को आर्थिक तौर पर छूट देने की भी जरूरत है। सेंड स्टोन उधोग से हर दिन हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा था। लेकिन अभी ये हालत असहनीय हो गई है। केंद्र सरकार को ऐसे वक्त पर गम्भीरता से सोचने की जरूरत है नही तो अगर ये उधोग बन्द हुए तो हजारों लोगों की रोजीरोटी खतरे में पड़ जाएगी।

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