पॉलिटिकल रिपोर्ट
(राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार)
Deoli News 13 मार्च ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) अब लोकसभा चुनावों की तारीखें घोषित होने में चंद दिन शेष बचे है। करीब 185 टिकट भी बीजेपी घोषित कर महासमर का बिगुल बजा चुकी है। लेकिन राजस्थान में शेष 10 बची सीटों पर उम्मीदवार घोषित करने के लिए कवायद जारी है। खासकर टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा सीट को लेकर असमंजस बना हुआ है। ये सीट यद्दपि दो बार लगातार बीजेपी ने जीती है।
लेकिन इस बार वर्तमान विधायक हरीश मीना को उतारने के बाद बीजेपी के लिए ” हैट्रिक” बनाना एक चुनौती भरा काम दिख रहा है। पिछली बार ये सीट लगभग डेढ़ लाख वोटों से बीजेपी जीती थी। इस बार वर्तमान सांसद सुखबीर जौनापुरिया को टिकट मिलेगा या कोई नया उम्मीदवार उतारा जाएगा, इस पर संशय बना हुआ है। गौरतलब रहे निवर्तमान सांसद जौनापुरिया के बीते दो कार्यकाल के दौरान कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि नही रही। पार्टी में गुटबाजी समेत कई आरोपों के चलते इस बार उन्हें पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया। टोंक में पार्टी का जिलाध्यक्ष बदले जाने के बाद व नए चेहरे पूर्व विधायक अजीत मेहता को कमान सौंपे जाने के बाद लग रहा है कि जौनापुरिया के लिए मुश्किलें बढ़ गई है। ये ऐसे संकेत है जिनसे लग रहा है कि जौनपुरिया को या तो अलग जगह से उतारा जा सकता है या फिर उनका टिकट कट भी सकता है।
वर्तमान में देवली-उनियारा विधायक हरीश मीना को सांसद प्रत्याशी का कांग्रेस से टिकट दिए जाने के बाद पूरी तरह तय हो चुका है कि बीजेपी फिर से गुर्जर उम्मीदवार पर दांव खेल सकती है। गौरतलब रहे जनरल सीट होने के बावजूद दोनो ही पार्टियां जातिगत समीकरणों के हिसाब से गुर्जर-मीणा जाति के उम्मीदवारों को टिकट देती आई है। यहां दो बार गुर्जर तो एक बार मीणा उम्मीदवार चुनाव जीते है। हरीश मीना भी दौसा से सांसद रहते हुए कांग्रेस से विधायक का चुनाव लड़े थे और जीते। फिर से वे अबकी बार टोंक-सवाईमाधोपुर सीट से अपना भाग्य आजमाएंगे। जबकि बीजेपी सम्भवतः नए उम्मीदवार की तलाश में है। सबसे ज्यादा चर्चित नाम पूर्व विधायक व बीजेपी की राष्ट्रीय मंत्री अलका सिंह गुर्जर का चल रहा है। वे टोंक जिले से पूरी तरह वाकिफ भी है। उनके पति डॉ. नाथूसिंह गुर्जर इस इलाके से मंत्री व पार्टी के वरिष्ठ नेता भी रहे है। गत 7 वर्षों से अलका सिंह पार्टी संगठन में काम कर रही है। ऐसे में यदि अल्कासिंह को बीजेपी टिकट देती है तो कोई आश्चर्य नही होगा। इसके अलावा कर्नल बैंसला की पुत्री सुनीता बैंसला, जयपुर की महापौर सौम्या गुर्जर का नाम भी चर्चा में है। जबकि हकीकत ये है कि सुनीता बैंसला, सौम्या गुर्जर दोनो नाम क्षेत्र के लिए अनजाने है।
बैंसला परिवार से पार्टी टिकट देती है तो टोंक में फिर हरीश
नमोनारायण मीना के परिवार से परम्परागत मुकाबला संभव है और यदि पार्टी नए चेहरे में अल्कासिंह को टिकट देती है तो चुनाव बड़े रोचक होंगे। सौम्या गुर्जर को लेकर टोंक जिले में चर्चाएं जरूर है, लेकिन पार्टी आखिर किसे चुनेगी ये जल्द साफ होने वाला है।


