नए पर दांव खेलना कांग्रेस के लिए बन सकता मुसीबत!
(टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा क्षेत्र)
@राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार
Desk News 20 मार्च ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) भले ही टोंक-लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने पहले उम्मीदवार घोषित कर दिया हो, लेकिन बीजेपी जमा रही राजनीतिक बिसात में फिलहाल अग्रिम बढ़त की स्थिति में प्रतीत हो रही है। अव्वल तो देश के क़ई प्रदेशो में ” राममंदिर- मोदी” की लहर प्रभावी नजर आ रही है वहीं दूसरी और सीटों पर बीजेपी का चयन भी प्रभावी नजर आ रहा है। हालांकि टोंक- लोकसभा क्षेत्र में फिलहाल बीजेपी ने अपने अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा नही की है। लेकिन बीजेपी ने अपनी राजनीतिक पिच पर ” फील्डिंग” जमाने मे कोई कोर-कसर नही छोड़ी है। जिसकी वजह से इन चुनावों में ज्यादा फेरबदल की गुंजाइश नही दिख रही है।
उल्लेखनीय है बीते दो लोकसभा चुनावों में बीजेपी की बढ़त रही है। लगातार दो बार मोदी के नाम पर जीते बीजेपी के सुखबीर जौनापुरिया के लिए इस बार टिकट लेने की दिक्कतें है और क्षेत्र में उनके लिए सबसे ज्यादा चुनोतियाँ भी है। कांग्रेस प्रत्याशी हरीश चंद्र मीना के लिए स्थिति आसान तभी बनेगी जब यदि बीजेपी जौनापुरिया को फिर से मैदान में उतारतीं हैं तो लगातार दो बार सांसद रहने के बावजूद जौनापुरिया ने पार्टी में न केवल गुटबाजी पैदा की है, बल्कि वे क़ई मामलों में विवादित भी रहे है। जौनापुरिया हरियाणा के है और वे गाहे- बगाहे ही क्षेत्र में आए है। क्षेत्र में बताने के नाम पर उनकी कोई बड़ी उपलब्धि नही है। अगर बीजेपी क्षेत्र के किसी व्यक्ति, नेता को टिकट देती है तो कांग्रेस के हरीश चंद्र मीना के सामने बदले हालातों के कारण व्यापक समस्याएं पैदा होनी संभव है। उम्मीद है पार्टी नए उम्मीदवार को टिकट देती है तो बीजेपी की राह ज्यादा आसान होगी।
लोकसभा चुनाव से पूर्व टोंक में बीजेपी का जिलाध्यक्ष बदलने से व मोर्चो के जिलाध्यक्ष बदलने से बीजेपी के संगठन में बदलाव के संकेत मिल रहे है, जो कांग्रेस के लिए मुसीबत का संकेत है। विधानसभा प्रत्याशी विक्रम सिंह गुर्जर के बीजेपी में शामिल होने के बाद बीजेपी की फील्डिंग मजबूत हुई है। याद रहे बीते विधानसभा चुनाव में विक्रम सिंह गुर्जर ने करीब 18 हजार मत प्राप्त किए थे। पूर्व उप प्रधान उदयलाल गुर्जर को ओबीसी मोर्चा के जिलाध्यक्ष बनाने के बाद संगठन को धरातल पर मजबूती मिली है। साथ ही खबर ये भी आ रही है कि दो-एक दिनों में बड़ी संख्या में कांग्रेस के बड़े नेता, पार्षद, पंचायत समिति सदस्य भी पार्टी में शामिल हो सकते है। यदि ऐसा हुआ तो कांग्रेस के लिए ये बड़ा झटका साबित हो सकता है। हरीश चंद्र मीना वर्तमान में देवली-उनियारा क्षेत्र से विधायक है, जिन्होंने बीजेपी के विजय बैंसला को हराया था। बीते दिनों गुर्जर नेताओं को पार्टी में जगह, पद दिए जाने के बाद कांग्रेस के लिए राह थोड़ी मुश्किल जरूर हुई है। कुल मिलाकर कहे तो बीजेपी जिस तरह से लोकसभा चुनावों की ” फील्डिंग” जमाने की कोशिश कर रही है, उससे कांग्रेस घिरती नजर आ रही है।
यदि बीजेपी नेतृत्व ने टिकट देने में कोई गलती नही की तो कांग्रेस को कठिन मुकाबले से कोई नही रोक पायेगा!! ये तय सा प्रतीत हो रहा है। अगर जातिगत आधार को छोड़कर बीजेपी ने टिकट दिया तो पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी, जिसकी उम्मीद किसी को नही होगी। ये चुनाव हालांकि देश के है, जिसमे बीजेपी की हालत बेहतर प्रतीत होती है लेकिन बात वहीं फिर नए उम्मीदवार के लिए है। कांग्रेसी प्रत्याशी हरीश चंद्र मीना सवाईमाधोपुर के बामनवास के निवासी है, यदि बीजेपी स्थानीय व्यक्ति को टिकट देती है तो ये चुनाव ज्यादा रोचक हो सकते है। बीते विधानसभा चुनाव में टोंक जिले 4 सीटों में से कांग्रेस ने टोंक व देवली-उनियारा सीटे जीती है। जबकि निवाई, मालपुरा सीटे बीजेपी ने जीती है। टोंक में कांग्रेस के सचिन पायलट ने करीब 56 फीसदी मत प्राप्त किए थे। जबकि बीजेपी के अजीत मेहता ने करीब 41 फीसदी मत प्राप्त किए थे। देवली- उनियारा में कांग्रेस ने करीब 47 फीसदी तो बीजेपी ने करीब 38 फीसदी, मालपुरा में बीजेपी ने 41 फीसदी तो कांग्रेस ने 33 फीसदी मत प्राप्त किए थे। मालपुरा में एक गुर्जर उम्मीदवार ने 23 फीसदी मत प्राप्त किए थे, जिससे ये चुनाव त्रिकोणीय हो गया था।
लेकिन बाजी बीजेपी के कन्हैया लाल चौधरी ने जीती। निवाई में बिजली के रामसहाय को 46 तो कांग्रेस के प्रशांत बैरवा को करीब 40 फीसदी मत मिले थे। उक्त चुनाव परिणामों से प्रतीत होता है कि इस बार लोकसभा चुनाव में इसका उलटफेर संभव है।


