Desk News 26 दिसंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) कृषि विभाग ने शीतलहर व पाले से फसलों को होने वाले संभावित नुकसान के लिए एडवाइजरी जारी की है, ताकि किसान सतर्क रहकर फसलों की सुरक्षा कर सके। पाले के प्रभाव से पौधों की पत्तियां व फूल झुलसकर झड जाते है एवं पौधों की फलियों-वालियों में दाने बनते नहीं हैं या सिकुड़ जाते हैं।
रबी की फसलों में फूल व बालियों के समय पाला पड़ने पर सर्वाधिक नुकसान की संभावना रहती है। फसलों को पाले से बचाने के लिए गंधक के तेजाब का 0.1 प्रतिशत यानि एक हजार लीटर पानी में एक लीटर सांद्र गंधक का तेजाब का घोल तैयार कर फसलों पर छिड़काव करें अथवा घुलनशील गंधक के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव भी कर सकते हैं। नकदी सब्जी वाली फसलों में भूमि के तापमान को कम होने से बचाने के लिए फसलों को टाट, पॉलिथिन अथवा भूसे से ढकना होगा। पाले के दिनों में फसलों में सिंचाई करने से भी पाले का असर कम होता है तथा पाले के स्थाई समाधान के लिए खेतों की उत्तर-पश्चिम दिशा में मेडों पर घने ऊंचे वृक्ष लगाए। जब आसमान साफ हो, हवा न चल रही है और तापमान काफी कम हो जाए।
तब पाला पडने की संभावना बढ़ जाती है। दिन के समय दोपहर में पहले ठंडी हवा चल रही हो या हवा का तापमान अत्यंत कम होने लग जाए और दोपहर बाद अचानक हवा चलना बंद हो जाए तब पाला पडने की आशंका बढ जाती है। पाले के कारण पौधों की कोशिकाओं में उपस्थित जल जमने से कोशिका भित्ति फट जाती है, जिससे पौधों की पत्तियां, कोंपलें, फूल एवं फल क्षतिग्रस्त हो जाते है। इस समय कृषकों को सतर्क रहकर फसलों की सुरक्षा के उपाय अपनाने चाहिए।



