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देवली रोडवेज बस स्टैंड को बाईपास शिफ्ट करने के प्रस्ताव पर मचा बवाल
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व्यापार चौपट होने के डर से जनता में भारी आक्रोश
@आशीष बागड़ी
Deoli News 23 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर के हृदय स्थल पर स्थित राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) के बस स्टैंड को जयपुर-कोटा बाईपास पर कृषि उपज मंडी के पास स्थानांतरित करने के प्रस्ताव ने शहर में एक नई बहस और भारी विरोध को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर रोडवेज प्रशासन अव्यवस्थाओं और आए दिन होने वाले विवादों से तंग आकर इस कदम को जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के व्यापारी और आम लोग इसे देवली की आर्थिक रीढ़ पर प्रहार मान रहे हैं। लिहाजा प्रशासन और शहर के लोगों को अब इस पर विचार करने की जरूरत है। यदि समय रहते इन समस्याओं पर गौर नहीं किया गया तो शहर के हालात बद से बदतर हो जाएंगे।
स्थानांतरण की मुख्य वजह : अव्यवस्था, अतिक्रमण और असुरक्षा
रोडवेज अधिकारियों व कर्मचारियों का तर्क है कि वर्तमान बस स्टैंड परिसर अब बसों के संचालन के लायक नहीं बचा है। पिछले कुछ वर्षों में यहाँ अव्यवस्थाएं चरम पर पहुँच गई हैं। सबसे मुख्य समस्या लोक परिवहन बसों की मनमर्जी है। नियमों के विरुद्ध ये बसें स्टैंड के भीतर बेतरतीब खड़ी रहती हैं, जिससे रोडवेज बसों को पार्किंग के लिए जगह नहीं मिल पाती। जिससे अव्यवस्था के साथ निगम को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। रोडवेज की बसों को स्टैंड पर घुसने से लेकर निकलने तक काफी मशक्कत होती है ऐसी स्थिति में कई बार किसी अन्य वाहन के टक्कर लगने पर विवाद बढ़ जाता है। पिछले दिनों एक बार तो रोडवेज बस को प्रवेश द्वार पर एक घंटे तक विवाद का सामना करना पड़ा। यहां बस एक घंटे तक खड़ी रही और खूब तमाशे हुए।
इसके अलावा स्टैंड परिसर में तीन दर्जन से अधिक चलायमान खाद्य पदार्थों के ठेले और खोमचे लग चुके हैं, जो बस संचालन के मार्ग को अवरुद्ध करते हैं। यह ठेले बसों की पार्किंग की जगह खड़े हो जाते हैं। जगह की भारी कमी के कारण अक्सर बसों की ठेलों से टक्कर हो जाती है, जो बाद में ड्राइवर-कंडक्टर के साथ मारपीट और हिंसक झड़पों में बदल जाती है। पिछले दो-तीन महीनों में चालक-परिचालकों के साथ हुई मारपीट की घटनाओं ने विभाग को कड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। रोडवेज बस के रुकते ही खाद्य विक्रेता बसों में चढ़कर अव्यवस्थाएं करते हैं। आए दिन यात्रियों की जेब कटना व सामान पार होना आम बात हो गई। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि रोडवेज की बसें ही सुरक्षित और सुगमता से खड़ी नहीं हो सकेंगी, तो वर्तमान परिसर का औचित्य समाप्त हो जाता है।
व्यापारियों की चिंता : मंडी के बाद अब बस स्टैंड भी गया तो शहर हो जाएगा ‘वीरान’
बस स्टैंड शिफ्ट होने की खबर मिलते ही शहर के व्यापारिक संगठनों ने लामबंदी शुरू कर दी है। व्यापार महासंघ देवली के अध्यक्ष पंकज जैन सर्राफ का कहना है कि जब से कृषि उपज मंडी शहर से बाहर स्थानांतरित हुई है, तब से स्थानीय व्यापार पहले ही 50 प्रतिशत तक गिर चुका है।
अब यदि बस स्टैंड भी बाहर चला गया, तो शहर की रौनक पूरी तरह खत्म हो जाएगी और सैकड़ों दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। व्यापारियों का मानना है कि रोडवेज बस स्टैंड के बाहर जाने से न केवल व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि आम जनता, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और छात्रों को बस पकड़ने के लिए कई किलोमीटर दूर बाईपास तक जाना पड़ेगा, जो असुरक्षित और असुविधाजनक होगा।
लोक परिवहन और निजी वाहनों का बढ़ता दबाव
देवली बस स्टैंड की एक अनोखी समस्या यह है कि यहाँ लोक परिवहन की बसें परिसर के भीतर तक आती हैं, जबकि अन्य शहरों में ये स्टैंड से बाहर ही रुकती हैं। इसके साथ ही यात्रियों को छोड़ने आने वाले निजी वाहनों, कारों और टैक्सियों की अनियंत्रित पार्किंग ने इस परिसर को पूरी तरह सिकोड़ दिया है। अव्यवस्था का आलम यह है कि कई महत्वपूर्ण रूट की बसें अब शहर के भीतर आने के बजाय सीधे बाईपास या पेट्रोल पंप होकर निकल जाती हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है।
समाधान की तलाश : क्या यथावत रह सकता है बस स्टैंड?
रोडवेज निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि वर्तमान समस्याओं जैसे ठेलों का अतिक्रमण, लोक परिवहन बसों की दादागिरी और पार्किंग की अव्यवस्था का स्थाई समाधान स्थानीय प्रशासन और व्यापार मंडल करवा दे, तो वे इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार हो सकता हैं। दूसरी ओर व्यापार महासंघ ने अब सभी सामाजिक संगठनों को साथ लेकर विरोध प्रदर्शन करने और व्यवस्था सुधारने में सहयोग देने की बात कही है। व्यापारियों का कहना है कि वे प्रशासन के साथ मिलकर एक ऐसी कार्ययोजना बनाने की कोशिश करेंगे। जिससे रोडवेज चालकों को कोई परेशानी न हो और बस स्टैंड भी शहर के भीतर ही बना रहे। अगले महीने से रोडवेज के बेड़े में नई बसें शामिल होने की उम्मीद है। यदि मौजूदा अव्यवस्था बरकरार रहती है, तो बसों की संख्या बढ़ने पर स्थिति और भी विस्फोटक हो सकती है। फिलहाल रोडवेज निगम ने टोंक जिला कलक्टर को पत्र लिखकर नई जगह के लिए 7000 वर्ग फीट जमीन की मांग कर दी है।
लेकिन शहरवासियों का विरोध इस प्रक्रिया में एक बड़ा रोड़ा साबित हो सकता है। अब गेंद स्थानीय प्रशासन और शहर के प्रबुद्धजनों के पाले में है कि वे किस प्रकार विकास और सुविधा के बीच तालमेल बिठाते हैं। क्या देवली अपनी रौनक बचा पाएगा या फिर विकास की दौड़ में बस स्टैंड भी बाईपास का हिस्सा बन जाएगा? इसके लिए लोगों को मिलकर विचार करने का अब समय आ गया है।
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