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देवली उप-जिला अस्पताल निर्माण मामला
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जन-विरोध के आगे झुका प्रशासन
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अस्पताल की नई लोकेशन पर हुआ था बवाल
@आशीष बागड़ी
Deoli News 5 जून (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) देवली में प्रस्तावित 100-150 बैड वाले उप-जिला अस्पताल के नए भवन निर्माण को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थम गया है। राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर देवली में अस्पताल निर्माण हेतु आमंत्रित ई-निविदा संख्या को अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
इस निर्णय के बाद क्षेत्र में चल रही निर्माण संबंधी अटकलें और विवादों पर फिलहाल विराम लग गया है। इस पूरे मामले का विश्लेषण करें तो यह स्पष्ट होता है कि यह निर्णय स्थानीय स्तर पर पनपे जन-आक्रोश का परिणाम है। गत कुछ वर्षों से राजकीय उप-जिला अस्पताल में स्थान की कमी के कारण नए भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसके लिए दो वर्ष पूर्व ही स्थलों का चयन शुरू कर दिया गया था। हाल ही में जब करीब 34 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण कार्य के टेंडर जारी हुए और भवन के नक्शे सार्वजनिक हुए, तो शहर के व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों ने इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया।
विरोध प्रदर्शन का यह है मुख्य तर्क
विरोध करने वालों का मुख्य तर्क यह था कि अस्पताल के लिए प्रस्तावित स्थान शहर से काफी दूर है, जिससे आमजन को इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि लोगों ने इसी तरह रोडवेज बस स्टैंड को भी विस्थापित करने का पुरजोर विरोध किया है। विरोध की इस आग ने बीते दो सप्ताह में बड़ा रूप धारण कर लिया था। देवली के लोगों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपे, कड़ा विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। लोगों का यह भी मानना था कि देवली के निकट ही अन्य सरकारी कार्यालयों के पास खाली पड़ी भूमि अस्पताल के लिए अधिक उपयुक्त हो सकती है। इस मांग को लेकर स्थानीय विधायक को भी अवगत कराया गया था।
भाजपा कार्यकर्ताओं समेत व्यापार महासंघों ने एकजुट होकर अस्पताल को देवली के करीब ही रखने की मांग को प्रमुखता से उठाया था। हालांकि प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो इस मामले के दो अलग-अलग पहलू सामने आ रहे हैं।
…तो क्या अब थमेगा विकास का सफर
एक ओर जहां स्थानीय लोग इसे जन-आंदोलन और एकता की बड़ी जीत मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग टेंडर निरस्त होने को विकास कार्यों में देरी के रूप में देख रहे हैं। इस वर्ग का तर्क है कि 150 बिस्तरों वाले आधुनिक अस्पताल के लिए एक विशाल भूखंड की आवश्यकता होती है, जो शहर के बेहद करीब मिलना चुनौतीपूर्ण है।

उनका मानना है कि शहर के विस्तार और स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए कभी-कभी भौगोलिक स्थान से जुड़े समझौतों को स्वीकार करना पड़ता है, ताकि बड़ा और सुसज्जित अस्पताल जल्द तैयार हो सके। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जब नगर पालिका क्षेत्र का विस्तार हो चुका है तो यह भवन इसी क्षेत्र में ही तो बन रहा है। ऐसे में दूरी वाली बात कहां रही। वर्तमान में टेंडर प्रक्रिया निरस्त होने के आदेश ने निर्माण की दिशा को फिलहाल कुछ समय के लिए अनिश्चित बना दिया है। आदेश में जहां ‘अपरिहार्य कारण’ बताए गए हैं, लेकिन शेष शर्तें यथावत रखी गई हैं। अब देखने वाली बात यह है कि क्या विभाग जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए किसी नए और सर्वसम्मत स्थान का चयन करता है, या फिर भविष्य में किसी अन्य विकल्प के साथ यह प्रक्रिया फिर से शुरू की जाएगी। फिलहाल, देवली की जनता इस निर्णय को अपनी सफलता के रूप में देख रही है।

लिहाजा अब लोग बस स्टैंड को भी यथावत रखने के लिए और अधिक कॉन्फिडेंट हो गए हैं। आमजन की मांग है कि देवली के पुराने धान मंडी को भी गौण मंडी का दर्जा दिया जाए।
पूर्व में किए गए विरोध प्रदर्शन की खबर:-
सरकारी अस्पताल, बस स्टैंड स्थानांतरण और पुरानी मंडी बहाली की मांग


