सल्लेखना व्रत से निर्वाण
Deoli News 18 फरवरी( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) जैन समाज के प्रखर चिंतक, कठोर तपस्वी, आराध्य संत आचार्य शिरोमणि विद्यासागर के आकस्मिक निर्वाण प्राप्त करने पर जैन समाज स्तब्ध है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के चन्द्रगिरि तीर्थ पर शनिवार देर रात सल्लेखना व्रत के जरिए निर्वाण प्राप्त किया।
रविवार सुबह जैसे ही उनके निर्वाण की खबर मिली लोग हतप्रभ रह गए और शहर में शोक की लहर फेल गई। पूर्व कृषि मंत्री व प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष डॉ. प्रभुलाल सैनी ने आचार्य को समाज मे नई चेतना, तपश्चर्या का पर्याय बताते हुए कहा कि उनके निर्वाण प्राप्त करने से जैन समेत सभी समाजों को भारी क्षति हुई है, जिसकी पूर्ति संभव नही है। डॉ. सैनी ने कहा कि आचार्य कठोर तपस्वी के साथ गम्भीर लेखक के साथ चिंतक भी थे। उन्होंने जैन समाज को बहुत ऊंचाइयां प्रदान की, जिन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी विद्दता का कोई सानी नही था। वे अहिंसा के पुजारी थे। उन्होंने ने जैन समाज के साथ हिन्दू समाज को भी नई दिशा प्रदान की।
आचार्य की तपस्या के बड़े अनुकरणीय उदारहण सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनके कृतित्व के प्रति पूरी मानव जाति सदैव आभारी रहेगी।


