हरदिन दर्शनों के लिए जुटते है देश के हजारों श्रद्धालु
(बागेश्वर बालाजी धाम यात्रा वृतांत)
@राजेन्द्र बागड़ी वरिष्ठ पत्रकार @आशीष बागड़ी
Desk Report 13 दिसम्बर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) जिज्ञासा, आस्था ओर आद्यात्मिक सवालों के जवाब मन मे ही मिलते है। यदि भरोसा है तो हमारी सांस्कृतिक विरासत को जरूर देखना चाहिए। मध्यप्रदेश के खुजराहो के पास गत कुछ वर्षों से गढ़ा गांव स्थित बागेश्वर बालाजी धाम ने देश ही नही विदेशों के श्रद्धालुओं के लिए जिज्ञासा व श्रद्धा का केंद्र बन गया है। पुराणों में उल्लेखित चिरंजीवी श्रीहनुमानजी महाराज के कलयुग में सशरीर मानव का कल्याण करने के लिए पृथ्वी पर रहने वरदान मिलने के सबूत है।
ऐसा ही एक चर्चित स्थान है बागेश्वर धाम। बागेश्वर बालाजी के प्रतिनिधि के रूप में धीरेंद्र शास्त्री देश ही नही विदेशों में भी प्रमुख आध्यात्मिक प्रभुता के रूप विख्यात है। मुझे भी परिवार सहित वहां जाने का सौभाग्य मिला, श्रद्धालुओं के लिए ये जानकारी उपलब्ध करवा रहे है। जिससे वे लाभ उठा सके। कहते बिना ईश्वर कृपा के कोई दर्शन नही हो सकते। सुंदर कांड में भी इस बात का श्लोकों में वर्णन है” बिना हरि कृपा नही मिले….” बहरहाल हमारी बागेश्वर धाम जाने की इच्छा तो बहुत दिनों से थी।
लेकिन उम्मीद नही थी कि बहुत कम समय मे ऐसे अनजाने आध्यात्मिक केंद्र के लिए हमारे जाने के योग बैठ जाएंगे। हमे ये तो पता था कि उक्त स्थल मध्यप्रदेश में है ल। लेकिन रास्तों की पूरी जानकारी नही थी। कुछ जानकारी तो एटलस ( मानचित्र) से जुटाई तो पहले वहाँ जा चुके सज्जनों से जुटाई। गूगल सर्च भी कभी-कभार गलत सिद्ध हो जाता है। क़ई नए राजमार्ग गूगल पर अपडेट नही होते है। बहरहाल 11 दिसम्बर को कार से रवाना हुए। व्यवहारिक जानकारी तो थी नही पर आस्था और विश्वास हमारा सबसे बड़ा मार्गदर्शक था। देवली से कोटा ओर उसके बाद बारां, शाहाबाद होते हुए झांसी पहुचे।
हालांकि नेशनल हाईवे है। लेकिन क़ई स्थलों से ये नए राजमार्ग मिलते भी है और विभाजित भी होते है। कन्फ्यूजन पैदा भी होता है। लेकिन बागेश्वर धाम जाने के लिए आपको सबसे पहले उत्तरप्रदेश के झांसी शहर पहुँचना होता है। ये यात्रा का पहला पड़ाव इसलिए है कि इसके बाद क़ई राष्ट्रीय राजमार्ग विभाजित भी होते और मिलते भी है। यूँ तो श्रद्धालु रेलमार्ग से भी जा सकते है। झांसी से खुजराहो जाने वाले रेलमार्ग पर छतरगढ़ स्थल है, जो जिला मुख्यालय भी है और रेलवे स्टेशन भी है। रेल मार्ग से जाने वाले श्रद्धालु छतरगढ़ उतरकर बसों व टेम्पो से करीब 40 किमी दूर “गढ़ा” जिसे अब बागेश्वर धाम के नाम से जाना जाने लगा है, जा सकते है। लेकिन जो श्रद्धालु सड़क मार्ग से यात्रा करना चाहते है, उन्हें कोटा से झांसी जाना होगा और फिर बस स्टैंड से खुजराहो मार्ग जाने वाली बसों से छतरपुर उतरना होगा। छतरपुर से आप बस, टैम्पो की मदद से 40 किमी दूर बागेश्वर धाम पहुँच सकते है।
बस से ये यात्रा करीब 15 से 18 घण्टों में पूरी हो सकती है तो ट्रेन से भी इस यात्रा में कम से कम 10 घण्टों का समय तो लग ही सकता है। जो श्रद्धालु अपने निजी वाहनों से बागेश्वर धाम जाना चाहते है तो उन्हें कोटा से झांसी और उसके बाद खुजराहो मार्ग पर जाना होगा। देवली से बागेश्वर धाम का रास्ता कार से थोड़ा विश्राम करते हुए 9 घण्टों में पूरा किया जा सकता है। देवली से बागेश्वर धाम की दूरी सड़क मार्ग से करीब 600 किमी है। झांसी से कानपुर, आगरा, इलाहाबाद आदि राष्ट्रीय राजमार्ग विभाजित होते है। यहाँ कन्फ्यूजन हो सकता है लिहाजा झांसी बाईपास का उपयोग करें और झांसी से खुजराहो वाले बाईपास का चुनाव करें।
झांसी- खुजराहो तक राष्ट्रीय राजमार्ग है। खुजराहो से करीब 35 किमी पहले ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर लेफ्ट साइड को ” बागेश्वर धाम” का बड़ा बोर्ड देखने को मिलेगा। सर्विस रोड के जरिए नीचे उतरकर आप 5 किमी दूर बागेश्वर धाम तक पहुँच सकते है। ये स्थान ख्याति के शिखर पर है। लेकिन अभी ये विकसित अवस्था मे यहाँ धर्मशाला उपलब्ध नही है लेकिन छोटे होटल्स, रेस्ट हाउस मिल सकते है। वतर्मान में क़ई नए होटल्स, रेस्टहाउस का निर्माण चल रहा है। बागेश्वर धाम पहुँचने से पहले अपने ठहरने की व्यवस्था करनी होगी। मंगलवार और शनिवार को वहाँ ठहरने के स्थान मिलना बहुत मुश्किल है। ऐसे में आपको रात्रि विश्राम के लिए छतरपुर या खुजराहो जाना पड़ सकता है। दोनो स्थलों पर होटल्स, रेस्टहाउस उपलब्ध है।
ईश्वर की अनुकम्पा रही हम सुबह 6 बजे चले और अपरान्ह पौने 4 बजे बागेश्वर धाम पहुँच गए। मन मे सिर्फ बागेश्वर बालाजी के दर्शन के लिए निकले थे और ईश्वर की इच्छा शायद और भी थी। हालांकि थोड़ी कठिनाई आई पर हमें एक शानदार रेस्ट हाउस मिल गया। हमारी विश्राम स्थली से बागेश्वर धाम महज 150 मीटर था। संयोग से हम बागेश्वर बालाजी के दर्शनों के लिए निकले लेकिन भीड़ बहुत थी। पूछताछ की तो पता लगा श्री धीरेंद्र शास्त्री वहा दरबार मे आने वाले थे। सहसा विश्वास तो नही हुआ लेकिन ये सम्भवतः बालाजी महाराज की कृपा होगी, हमे बिना लम्बी प्रतीक्षा के धीरेंद्र शास्त्री के पास से दर्शन हुए। उनके दिव्य दरबार को देखने और समझने का अवसर भी मिला। हजारों की संख्या में गरीब, पीड़ित अपनी गहन आस्था के बल पर सर्दी में खुले आम आसमान के तले रात गुजारते दिखे।
यहीं आस्था और श्रद्धा का महान संगम देखने को मिला। यदि अवसर मिले तो बालाजी के इस नए आध्यात्मिक केंद्र के दर्शन के लिए जाना चाहिए।


