Deoli News 23 सितंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) जैन समाज के दसलक्षण महापर्व के तहत देवली में मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि त्याग करने वाला हल्का होकर ऊपर की ओर बढ़ता है।
मुनि के त्याग के कारण पूज्यता प्राप्त करते हैं और प्रकृति भी त्याग का संदेश देती है। मुनि ने कहा कि दान सरल, लेकिन त्याग कठिन लगता है। त्याग से सुख-शांति मिलती है। मेघ पानी और वृक्ष पत्ते-फल का त्याग करते हैं, तभी उनका स्वभाव और विकास बना रहता है। संग्रह करने वाला कष्ट पाता है, जबकि त्याग आत्मिक उन्नति का मार्ग है। दान में अपेक्षा हो सकती है, लेकिन त्याग स्वार्थरहित होता है। यह जानकारी अंकित जैन डाबर ने दी।
नासिरदा में मंडल विधान के साथ उत्तम त्याग धर्म की पूजा
श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व के तहत दस लक्षण मंडल विधान पूजा जारी है। नित्य नियम पूजा, मूलनायक पार्श्वनाथ पूजा और सोलह कारण पूजा के साथ उत्तम त्याग धर्म की पूजा पं अभिषेक कुमार ने कराई। आचार्य विद्यासागर महाराज के प्रवचनों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि जैसे आम खाने से पहले उसे नरम कर डंठल और चैंप हटाया जाता है।
वैसे ही त्याग धर्म में आसक्ति को ढीला कर संग्रह छोड़ना और उपयोग से पहले त्याग करना आवश्यक है। महामंत्री राजेश कटारिया ने बताया कि बोली के माध्यम से आज के सौधर्म इंद्र बनकर शांतिधारा करने का सौभाग्य बरदीचंद, मानमल, नवरत्न और तेजपाल जैन को मिला। शाम को संगीतमय सामूहिक आरती है।


