Deoli News 7 नवंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर नामांकन बनने की तिथि व तय समय खत्म हो चुका है। रिटर्निंग अधिकारी में डेढ़ दर्जन प्रत्याशियों ने नामांकन भरे। अब नामांकन वापसी का दौर चलेगा।

हालांकि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की सही स्थिति नामांकन वापस लेने के समय खत्म होने के बाद साफ होगी। लेकिन देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी से बागी होकर दो नेताओं ने नामांकन भरा है। इनमें विक्रम सिंह गुर्जर व पूर्व जिला प्रमुख के पति रामसिंह मीणा है। विक्रम सिंह गुर्जर ने कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने से खफा होकर हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण की तथा उसके टिकट पर नामांकन भी भरा।
हालांकि यह लगभग तय था कि कांग्रेस से टिकट मिले या नहीं मिले विक्रम सिंह गुर्जर को चुनाव लड़ना था। लेकिन गुर्जर ने एनवक्त पर आरएलपी का दामन थामा तथा जाट वोटो पर अपनी पकड़ बनाने का प्रयास किया है। उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर विक्रम सिंह गुर्जर पिछले कई वर्षों से देवली उनियारा क्षेत्र में विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर तैयारी कर रहे थे। ऐसे में उनकी ग्रामीण क्षेत्रों तक पैठ है। प्रोफेसर विक्रम सिंह गुर्जर भाजपा व कांग्रेस दोनों प्रत्याशियों के लिए चुनौती होंगे। इसी तरह मानपुरा निवासी व पूर्व जिला प्रमुख कल्ली देवी के पति रामसिंह मीणा ने भी कांग्रेस से बागी होकर सोमवार को नामांकन दाखिल किया है। रामसिंह मीणा का पूरा परिवार कांग्रेस पार्टी से है। ऐसे में रामसिंह मीणा के चुनाव लड़ने से कांग्रेस पार्टी को निश्चित तौर पर नुकसान होगा। वह भी पिछले कई माह से चुनाव की तैयारी कर रहे थे। लिहाजा कांग्रेस पार्टी के लिए दो तरफ से नुकसान के मार्ग दिख रहे हैं। जबकि भाजपा में मुख्य तौर पर एक भी प्रत्याशी बागी होकर नामांकन नहीं भरा।
बीजेपी के गिले शिकवे दूर हुए
हालांकि इससे पहले बीजेपी से टिकट लेने वालों की लंबी लाइन थी। इनमें पूर्व कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी, पूर्व विधायक राजेंद्र गुर्जर, भाजपा नेता राजकुमार मीणा, सीताराम पोसवाल समेत एक दर्जन से अधिक नेता थे। प्रभुलाल सैनी को हिंडोली से टिकट दिया जा चुका है। जबकि अन्य किसी भी नेता ने पार्टी से बगावत नहीं की। हालांकि टिकट दिए जाने के बाद स्थानीय भाजपा नेताओं ने बाहरी प्रत्याशी का विरोध किया था।
लेकिन समय के साथ यह विरोध खत्म होता नजर आ रहा है। पिछले दिनों भाजपा प्रत्याशी ने पूर्व विधायक राजेंद्र गुर्जर से भी मुलाकात कर यह संदेश दिया कि उनकी पार्टी में फिलहाल कोई मतभेद नहीं है। लेकिन दोनों ही पार्टियों को भीतरघात के प्रति भी सतर्क रहना होगा। इसकी वजह राजनीति में दोस्ती भी कई मायने में होती है।


