Sunday, April 19, 2026
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HomeDeoli Newsनिकासी और नालों की सफाई होती तो शहर की दुर्दशा नही होती

निकासी और नालों की सफाई होती तो शहर की दुर्दशा नही होती

नगर पालिका प्रशासन गहरी नींद में, शहर के हालात बिगड़े

(राजेन्द्र बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार)

Deoli News 5 जुलाई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) अलसवेरे शुरू हुई वर्षा दोपहर तक पूरे शहर को बाढ़ में धकेल गई! सब और पानी की झीलें, थपेड़े मारता जल भराव हर किसी को झकझोर गया। ये हालात हर वर्ष होते है। लेकिन सबसे पहले तो नगरपालिका प्रशासन भूलता है और शहर की जनता भी भूल जाती है।

नतीज़न हर बार बाजारों में जलभराव से लाखों का नुकसान होता है। कालोनियां में 3-3 फीट तक पानी के जमाव से लोगों का आना जाना तक बंद हो जाता है लेकिन पालिका प्रशासन के ” जुं” तक नही रेंगती। दरअसल ये समस्या दशकों से है कितने ही बोर्ड आए और निकल गए। लेकिन हालात जस के तस है।शुक्रवार को करीब 7 घण्टे तक लगातार बारिश चली और दोपहर बाद शहर का कोई कोना ऐसा नही बचा जहाँ वर्षा का पानी नही भरा हो। शहर तेजी से बढ़ रहा है पर उसके अनुपात में सुविधाएं घट रही है। शहर में सीवरेज व्यवस्था नही है। बाजारों में जो नाले है, वे ज्यादा वर्षा का भार झेल नही सकते और तो ओर नालों की सफाई तक नही होती तो शहर को ज्यादा उम्मीद भी कैसे हो। इस वर्ष भीषण गर्मी के कारण ये उम्मीद थी कि सीजन में जोरदार वर्षा होगी। लेकिन नगरपालिका प्रशासन गहरी नींद में सोता रहा। नालों की सफाई समुचित नहीं हुई। नाले जाम थे और निकासी पूरी तरह ठप्प। ये तो होना ही था।

पालिका का हर वर्ष का बजट 7 करोड़ से 9 करोड़ तक पहुँच रहा है। लेकिन ये पैसा कहां लग रहा है, ये पालिका ही जाने आम आदमी की तो समझ से ये परे है। विकास शहर के इर्दगिर्द हो रहा है, सड़के बन रही है, स्ट्रीट लाईट लग रही है। लेकिन घर के हाल बेहाल है। सही तो ये है शहर में नाले ही नही है। शहर के लिए नया मास्टर प्लान बन रहा है। लेकिन शहर की समस्या बढ़ रही है। विकास की नई परिभाषा विकसित हो रही है। विकास स्वार्थ के गिरवी रख दिया गया। पार्षद चुप है! कोई आवाज उठाने वाला नही है। आखिर जनता इसलिए चुनती है क्या,

उन्हें! शहर के जनता कोलोनी, विवेकानंद कोलोनी, चर्च रोड, ममता सर्किल, सदर बाजार, पटवा बाजार, घोषी मोहल्ला, जहाजपुर रोड न जाने कितने क्षेत्र आज प्रभावित है। लोग बेहद परेशान है पर उक्त तकलीफों की फिक्र किसी नही है। अभी तो ये मानसून की शुरुआत भर है अगस्त का तो पूरा महीना बाकी है। अगर समय पर नही चेते तो शहर की दुर्दशा ऐसी होगी, जिसकी कभी कल्पना भी नही की होगी।

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