मकर संक्रांति पर हर वर्ष आंवा में खेला जाता है दड़ा
Deoli News 14 जनवरी (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) क्षेत्र के आवां में रियासतकाल से खेला जा रहा दडा महोत्सव की रविवार को मकर संक्रांति पर खेला गया। फटे पुराने कपड़ों से बना हुआ 70-80 किलो वजनी बड़ी गेंद (दडा) पर सैकड़ो ग्रामीणों ने जोर आजमाइश की। रविवार को महोत्सव में दडा खेलते खेलते बीच में अटक गया। जिसका संकेत हैं कि, इस बार साल मध्यम रहेगा, यानी इस बार न तो अकाल पड़ेगा, न सुकाल होगा।
उल्लेखनीय है कि मकर सक्रांति के मौके पर खेले जाने वाला खेल आने वाले साल का संकेत देता हैं। इससे पता चलता है कि आगामी वर्ष में अकाल पड़ेगा या सुकाल। इस खेल के अनुसार यदि खेल में दडा दूनी दरवाजा की तरफ चला जाए तो, यह साल सुख समृद्धि वाला होगा। इसके विपरीत यदि दड़ा अखनियां दरवाजा की तरफ चला जाए तो, संकेत होता है कि साल अच्छा नहीं होगा। इस साल वर्षा का अभाव होने के कारण अकाल होने जैसी स्थिति पैदा होगी। वहीं रविवार को ग्रामीणों की करीब 3 घण्टे की मशक्कत के बाद दडा खेलते खेलते बीच में ही अटक गया। इस बार साल मध्यम रहेगा, यानी इस बार न तो अकाल पड़ेगा, न सुकाल होगा। उल्लेखनीय है कि यह करीब 70-80 किलो वजनी गेंद से खेला गया अनोखा दंगल है, जिसे देखने के लिए आसपास के सैकड़ो गांव से लोग आते हैं। इस खेल को खेलने के लिए बारहपुरा गांव के ग्रामीण हिस्सा लेते हैं। जो दो भागों में बटकर पुराने कपड़ों, रस्सियों से बनी हुई करीब 70-80 किलो वजनी गेंद को एक दूसरे के पाले में पैरों से फुटबॉल की भांति धकेलने का प्रयास करते हैं।
इस खेल में 6-6 गांव के लोग बंट जाते हैं। इसके बाद दोनों गुटों में इस भारी-भरकम गेंद को पैरों से धकेलने के लिए जोरदार आजमाइश होती है।


