Deoli News 30 सितंबर (चेतन वर्मा) दूनी क्षेत्र के चांदसिंहपुरा में राजूलाल गुर्जर के निधन के बाद उनकी 11 वर्षीय इकलौती बेटी अमन ने पिता की पगड़ी की रस्म निभाई। यह फैसला मां कमलेशी देवी, बड़े पिता प्रेम चंद गुर्जर, रंगलाल गुर्जर और गांव के पंचों की सहमति से लिया गया। और गांव के पंचों की सहमति से लिए गए इस फैसले ने वर्षों पुरानी परंपरा को बदलते हुए समाज को बेटा-बेटी की समानता का संदेश दिया।
परंपरागत रूप से पगड़ी की रस्म परिवार का बड़ा बेटा निभाता है, लेकिन राजूलाल के कोई पुत्र नहीं होने पर पंचों ने उनकी बेटी अमन को यह अधिकार दिया। पिता की पगड़ी बेटी के सिर पर बांधने का दृश्य भावुक था। यह निर्णय बेटियों को बेटों के समान सम्मान और अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश है। इस फैसले ने बेटे की चाह में अधिक संतान पैदा करने जैसी सामाजिक कुरीति पर भी ध्यान आकर्षित किया। कई परिवारों में बेटे की उम्मीद में अधिक बेटियां होने से आर्थिक स्थिति और बच्चों की शिक्षा व परवरिश प्रभावित होती है।



