Tuesday, April 21, 2026
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HomeDainik Bureau Deskबांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ देवली में फूटा आक्रोश

बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ देवली में फूटा आक्रोश

जुलूस निकालकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन


Deoli News 26 दिसंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे लगातार हमलों, मंदिरों में तोड़-फोड़ और हाल ही में हुई दीपूचंद्र दास की नृशंस हत्या के विरोध में शुक्रवार को देवली में हिंदू समाज ने आवाज बुलंद की है। इस दौरान बांग्लादेश सरकार के सलाहकार का पुतला जलाकर विरोध व्यक्त किया गया।

निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति तथा विश्व हिंदू परिषद समेत हिंदू संगठनों व इससे जुड़े लोगों नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पूरे शहर में एक जुलूस निकाला गया, जिसमें कट्टरपंथ के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि बांग्लादेश में विभाजन के समय से ही अल्पसंख्यक समाज को निशाना बनाया जा रहा है। वहां हिंदुओं के घरों, प्रतिष्ठानों और कृषि भूमि पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। हाल ही में दीपूचंद्र दास के साथ जो अमानवीय कृत्य हुआ, उसने पूरी मानवता को शर्मसार कर दिया है। कट्टरपंथियों द्वारा उसे सड़क पर घसीटा गया और फिर पेड़ से लटकाकर जिंदा जला दिया गया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद से ही पूरे हिंदू समाज में गहरा दुख और रोष व्याप्त है।

राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में संगठनों ने मांग की है कि भारत सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाए। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पड़ोसी देश में रह रहे हिंदुओं के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए और वहां हुई जनहानि व संपत्ति के नुकसान का उचित मुआवजा दिलाया जाए। साथ ही, मांग की गई है कि वहां की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर भारत सरकार शांति सेना भेजने की दिशा में कदम उठाए और वहां से प्रताड़ित होकर आने वाले हिंदू शरणार्थियों को भारत में सुरक्षित आश्रय दिया जाए।

विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान सत्यनारायण साहू, विशाल राव, विक्रम सिंह, अशोक मंडल, शेखर मंडल, राजू विश्वास, प्रहलाद, रोबिन भक्त, जितेंद्र सिंह चौधरी, विनोद खुटेटा, सुरेश अग्रवाल, गोविंद गुप्ता, विनोद टाक, किशन माली, राजकुमारी, रेखा बैरागी, कल्पना विश्वास, योजना विश्वास और गोपी सरकार सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग थे।

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