Deoli News 20 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन पं योगेश शास्त्री ने समुद्र मंथन की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के आदेश पर देवताओं और दानवों द्वारा समुद्र मंथन किया गया।
इस अमृत कलश को प्राप्त करने के लिए दानवों और देवताओं के बीच विवाद छिड़ गया। लेकिन केवल अमृत ही नहीं, बल्कि समुद्र मंथन में अमृत, उच्चै:श्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, लक्ष्मीजी और धन्वन्तरि समेत 14 बहुमूल्य रत्न प्राप्त हुए। वही गजेंद्र मोक्ष की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि यह विष्णु की प्रसिद्ध लीलाओं में से एक है। विष्णु गजेंद्र (हाथी) को मगरमच्छ के चंगुल से बचाने के लिए पृथ्वी पर आए और गजेंद्र ने मोक्ष प्राप्त की। वहीं राजा सगर के पुत्रों के उद्धार की कथा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि सगर के वंशज दिलीप के पुत्र भागीरथ ने माता गंगा की तपस्या की। मां गंगा ने तपस्या से प्रसन्न होकर भागीरथ को दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। भागीरथ ने उन्हें धरती पर अवतरित होने का वरदान मांगा।
स्वर्ग से गंगा धरती पर आईं और कपिल मुनि के आश्रम में पहुंची। जिससे राजा सगर के पुत्रों को मुक्ति मिली। इस दौरान श्रीराम जन्म व विवाह की कथा भी सुनाई व श्रीराम व झांकी बनाई गई।


