Deoli News 13 जून (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर अटल उद्यान स्थित टीनशैड प्लेटफार्म पर आयोजित 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में महामंडलेश्वर दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि निष्काम भक्ति से ही प्रभु की प्राप्ति होती है।
जैसा कि केवट की निस्वार्थ भक्ति से प्रसन्न होकर प्रभु श्रीराम ने उन्हें दर्शन दिए थे। कथा के दौरान बापू ने बताया कि भगवान की प्रत्येक लीला में उनकी स्वयं की इच्छा प्रधान होती है। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए ही भगवान का अवतार हुआ था, और वनवास की लीला भी इसी उद्देश्य का हिस्सा थी। बापू ने भरत चरित का वर्णन करते हुए बताया कि चित्रकूट में जब अयोध्या और जनकपुर के वासी एकत्रित हुए, तो यह सिद्ध हो गया कि जहाँ प्रभु सीताराम हैं, वही अयोध्या और जनकपुर है।
उन्होंने कहा कि भरत ने जब श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह किया, तो रामजी ने पिता की आज्ञा का पालन करने का धर्म समझाया। इसके बाद भरत जी उनकी चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटे और 14 वर्ष के वनवास पूरा होने पर न आने की स्थिति में प्राण त्यागने का वचन लिया। कथा के अंत में बापू ने गोस्वामी जी के वचनों को उद्धृत करते हुए कहा गया कि भरत चरित का आदरपूर्वक श्रवण या पठन करने से सीताराम के चरणों में प्रेम प्राप्त होता है और मनुष्य माया-मोह से मुक्त हो जाता है। कथा के बीच भजनों पर महिलाओं में नृत्य किया। कार्यक्रम का समापन आरती के साथ हुआ।



