Tuesday, April 21, 2026
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HomeSocial Newsभाव के भूखे होते है भगवान, छप्पन भोग के नहीं

भाव के भूखे होते है भगवान, छप्पन भोग के नहीं


Deoli News 17 दिसंबर (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) अटल उद्यान स्थित टीनसेड प्लेटफार्म पर चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार रात कथावाचक प्रिया किशोरी ने कहा कि भगवान भाव के भूखे हैं, छप्पन भोग के नहीं।

प्रिया किशोरी ने कहा कि श्रीकृष्ण भगवान जब हस्तिनापुर पहुंचे, तब दुर्योधन ने उनके लिए 56 भोग तैयार करवाए। लेकिन भगवान ने विदुर काका के घर पहुंचकर विदुरानी के हाथ से केले के छिलके खाए। इससे पूर्व उन्होंने भोले बाबा द्वारा पार्वती को सुनाई गई अमर कथा के बारे में विस्तार से बताया। शिव बाबा द्वारा पार्वती को जिस गुफा में अमर कथा सुनाई गई। आज उसी गुफा को अमरनाथ गुफा कहते हैं। उन्होंने सुखदेवजी महाराज की जन्म का वृतांत सुनाया। महाभारत के अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु व उत्तरा के पुत्र राजा परीक्षित की कथा सुनाई। कथा में बताया कि अश्वत्थामा द्वारा गर्भस्थ शिशु पर ब्रह्मास्त्र चलाया गया। लेकिन भगवान कृष्ण ने रक्षा की। वही बालक कालांतर में राजा परीक्षित बने। राजा परीक्षित का हीरावती के साथ विवाह, जन्मेजय जैसे चार पुत्र, जंगल में कलयुग का मिलना। कलयुग द्वारा रहने का स्थान मांगने की कथा कही। उन्होंने कहा कि शुकदेवजी कहते हैं कि कलयुग झूठ, पाप की कमाई, सोने में रहता हैं, मांस, मदिरा खाने वाले तथा ताशपत्ती खेलने वाले के सिर पर कलयुग सवार होता है।

कलयुग सूक्ष्म रूप धरकर राजा परीक्षित के सिर पर बेइमानी की कमाई से अर्जित सोने के मुकुट में प्रवेश कर जाता है। सुखदेवजी ने राजा परीक्षित को 7 दिन तक भागवत सुनाई। जिससे परीक्षित का मोक्ष हुआ। इस दौरान मार्कंडेय पुराण के अनुसार गंधर्वराज विश्वावसु की पुत्री मदालसा और रितु ध्वज की कथा भी सुनाई।

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