Desk News 1 मई (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) हर साल मई एव जून में शादियों के खूब मुहूर्त होते हैं, लेकिन इस बार गुरु व शुक्र तारा अस्त होने से मई और जून में एक भी विवाह मुहूर्त नहीं है।
इसके बाद चातुर्मास की वजह से चार माह कोई विवाह मुहूर्त नहीं होगा। इस अवधि में अक्षय तृतीया (आखातीज) 10 मई, जानकी नवमी 16 मई, पीपल पूर्णिमा 23 मई, गंगा दशमी 16 जून, निर्जला एकादशी 18 जून एवं भडल्या नवमी 15 जुलाई को सावे है। इसके बाद में 12 नवम्बर से देवउठनी एकादशी पर सावों का अबूझ मुहूर्त होने से शादियां हो सकेगी। इस वर्ष वैशाख कृष्णा पंचमी 29 अप्रेल को रात्रि 23.14 बजे से पूर्व दिशा में अस्त होकर आषाढ़ कृष्णा सप्तमी शुक्रवार 28 जून को 17.05 बजे पश्चिम में शुक्र का उदय होगा। इस अवधि मे वैशाख कृष्णा तेरस 6 मई से गुरू अस्त होकर, ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी 3 जून को गुरुउ दय होगा। मनु ज्योतिष एवं वास्तू शोध सस्थान टोंक के निदेशक महर्षि बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि सूर्यदेव मेष राशि में उच्च के होकर भ्रमण कर रहे है। मेष राशि स्वामी मंगल है, सूर्य से गुरु व शुक्र का तारा अस्त होने से विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी।

देवउठनी पर है मुहूर्त योग
देवशयनी एकादशी यानि आषाढ़ शुक्ला एकादशी 17 जुलाई से देवउठनी एकादशी कार्तिक शुक्ला एकादशी 12 नवंबर तक चार माह देव-शयन काल होने से विवाह समेत मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी।
विवाह के कारक ग्रह
ज्योतिष शास्त्र में विवाह के लिए कुंडली मिलान, गुण दोष मिलान किया जाता है। इसके अलावा गुरु एवं शुक्र को विवाह का कारक ग्रह माना जाता है। यदि आकाश मंडल में गुरु और शुक्र ग्रह उदितमान हो, तभी विवाह के शुभ मुहूर्त होते हैं।
यदि ये ग्रह अस्त हो तो विवाह के लिए मुहूर्त नहीं होता। दोनों ग्रह के अस्त होने से मई-जून में विवाह के फेरे नहीं लिए जा सकेंगे।


