Deoli News 29 मार्च (दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) शहर स्थित बावड़ी बालाजी परिसर देवली में चल रही श्रीमदभागवत कथा में तीसरे दिन शिव विवाह कार्यक्रम हुआ। नन्हे मुन्ने बच्चों ने शिव पार्वती की जीवंत झांकी सजाई।
वहीं शिव बारात पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। बसंत महाराज ने कहा कि शिवजी जब बारात लेकर चलने लगे तो उनकी बारात में भूत-प्रेत, बेताल सब मग्न होकर नाच रहे थे। भगवान शिव स्वयं नंदी पर विराजमान थे और गले में नाग की माला धारण किए हुए थे। ऐसी मान्यता है कि उत्तराखंड में स्थित त्रियुगी नारायण मंदिर ही वह स्थान है जहां पर भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। शिव पार्वती ने फेरे लिए थे। यहां आज भी वह अग्नि प्रज्वलित है। जिसके फेरे शिव और पार्वती ने लिए थे। कथावाचक ने कहा कि इस संसार में मनुष्य का जन्म केवल भगवत प्राप्ति के लिए हुआ है। सांसारिक सुखों को भोगते हुए भी मनुष्य भगवान के भक्ति मार्ग पर चलकर जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर हरि चरणों में विलीन हो सकता है।



