टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा क्षेत्र
@आशीष बागड़ी
Dask News. 29 मार्च ( दैनिक ब्यूरो नेटवर्क) बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने तीसरी बार यद्यपि निवर्तमान सांसद सुखबीर जौनापुरिया को मैदान में उतारकर अपना भरोसा तो जता दिया। लेकिन अब मतदाता की बारी है कि वह तीसरी बार जौनापुरिया को जिताती हैं या फिर नए उम्मीदवार को मौका देती है। ये देखना दिलचस्प रहेगा।
हालांकि ये देश के बड़े आम चुनाव है और ये महत्वपूर्ण इसलिए भी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तीसरी बार चुनने की बारी है। मोदी के इस बार चार सौ पार के नारे से माहौल गरमाया हुआ है। लेकिन हकीकत ये भी है कि बीजेपी सांसद के उपेक्षित पूर्ण रवैये के कारण उन्हें टिकट मिलने के बाद आम जनता व कार्यकर्ताओं के कोप का भाजन भी बनना पड़ रहा है। बीते क़ई वर्षो तक सांसद रहने के बावजूद आम लोगों से सम्पर्क का अभाव, कार्य की दृष्टि से विशेष उपलब्धि नही होने से भी लोग नाराज है। खासकर मालपुरा, देवली- उनियारा, टोंक जैसे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा कार्यकर्ताओं के साथ आमजनता में रोष दिख रहा है। इसे शांत करने के लिए सांसद को जगह-जगह लोगों से माफी, क्षमा याचना भी करनी पड़ रही है। ऐसी हालत में जौनापुरिया के लिए काफी दिक्कत है, इसे कैसे नियंत्रण में लाते है ये उनकी काबिलियत पर निर्भर करेगा।
यूँ राममंदिर लहर के बाद बने वातावरण से बीजेपी को फायदा जरूर दिख रहा है। लेकिन जातिगत समीकरणो में ज्यादा बदलाव नही हुआ तो जौनापुरिया के लिए व्यापक दिक्कतें हो सकती है। मीना व गुर्जर बहुल सीट के समीकरण कैसे सेट होंगे, ये देखने वाली बात होगी। जौनापुरिया बीते दो टर्म में मोदी के नाम पर जीते है, इस बार फिर रिपीट होने से उनकी मुश्किलें बढ़ी है। यदि वे इन तथ्यों पर पार पर लेते है तो उनके लिए बड़ी बात तो नही होगी, क्योंकि इस बार फिर मोदी फैक्टर है। लेकिन मुश्किल ये है, वे किस तरह कार्यकर्ताओं को मनाते है और जनता को संतुष्ट करते है। ये देखने की बात होगी।
सचिन पायलट की और से टोंक सीट से कांग्रेसी प्रत्याशी हरीश चंद्र मीना को जिताने की जिम्मेदारी लेने से अब मुकाबला कांटे का लग रहा है, क्योंकि यदि ये सीट कांग्रेस हारती है तो पायलट की प्रतिष्ठा पर प्रभाव पड़ेगा।


